अगर उड़ना है, तो वो सब छोड़ना होगा
जो आत्मा पर भारी बोझ बनकर बैठ गया है।
हर डर, हर पछतावा, हर अधूरा वादा
जो अब साँस लेने की ताकत खो चुका है।
तुम भारी पैदा नहीं हुए थे कभी,
तुम्हें दुनिया ने भारी होना सिखा दिया।
अब समय है खुद को हल्का करने का,
अब समय है डर को पीछे छोड़ देने का।
जो दर्द अब कुछ नया नहीं सिखाता,
उसे चुपचाप विदा करने का समय है।
जो डर आगे बढ़ने से रोकता है,
उसे अपनी राह से हटाने का समय है।
उड़ान भागना नहीं, समझ का विस्तार है,
जहाँ यादें बोझ नहीं, हवा का आकार हैं।
कुछ छोड़ने से खाली नहीं हुआ जाता,
बल्कि खुद को फिर से पाया जाता है।
भरोसा रखो इस जीवन के सफर पर,
जो सच में तुम्हारा है, वह नहीं जाएगा।
छोड़ देने से अपना खोता नहीं कभी,
सच अपना रास्ता खुद बना जाएगा।