खुश रहो, क्योंकि दुखी रहकर दुख कम नहीं होता।
दुख बस भीतर-भीतर अपनी जड़ें गहरी करता जाता है।
दुख चिल्लाने से नहीं, समझने से थोड़ा शांत होता है।
आँसुओं से नहीं, स्वीकार करने से हल्का होता है।
जो मिला नहीं, उसकी सूची बहुत लंबी हो सकती है।
पर जो मिला है, वही जीवन की असली पूँजी है।
हर रात अँधेरा ही नहीं, कुछ उम्मीद भी साथ लाती है।
हर मौन हार नहीं, कुछ उत्तर मौन में ही जन्म लेते हैं।
खुश रहना कोई बड़ा उत्सव नहीं होता।
यह खुद को टूटकर भी संभालने का निर्णय होता है।
दर्द रहेगा, पर वह जीवन का मालिक नहीं बनेगा।
स्मृतियाँ रहेंगी, पर भविष्य वे तय नहीं करेंगी।
मुस्कान दुख का इनकार नहीं होती।
मुस्कान दुख पर जीत का सबसे शांत तरीका होती है।
आँसू आएँ, पर मन को बंद न करें।
समय आएगा और घाव भी भर जाएगा।
खुद से प्रेम करना सबसे बड़ी समझदारी है।
छोटी खुशियों में भी जीवन खोज लेना चाहिए।
अंधेरे में भी रोशनी की एक उम्मीद रखना चाहिए।
खुश रहना एक शांत और सुंदर निर्णय है।