ज़िंदगी से कभी बहुत ज्यादा नहीं माँगा मैंने।
न सोने का ताज, न हर दिन की जीत माँगी मैंने।
बस सुबह आँख खुलने की एक वजह चाही।
और रात सोते समय हल्का दिल चाहा।
कभी ज़िंदगी ने मुस्कान उधार दे दी।
कभी आँखों में चुपचाप आँसू रख दिए।
कभी हाथ थाम लिया, कभी अकेला छोड़ दिया।
पर हर दिन मुझे थोड़ा और मजबूत बना दिया।
भीड़ में एक ऐसा चेहरा चाहिए था।
जहाँ कमज़ोरी दिखाना भी आसान लगे।
जहाँ बिना बोले भी समझ मिल जाए।
जहाँ दिल का बोझ हल्का हो जाए।
मैंने दोस्ती माँगी थी इस दुनिया से।
किस्मत ने दिलों की बारात भेज दी।
कुछ लोग हँसी से पहले चुप्पी समझ गए।
कुछ लोग दर्द के पीछे छिपी बात पढ़ गए।
कुछ रिश्ते अचानक नहीं आते जीवन में।
वे धीरे-धीरे खून की धड़कन बन जाते हैं।
पहले नाम बनते हैं, फिर आदत बन जाते हैं।
फिर एक दिन हमारी ज़रूरत बन जाते हैं।
जब दुनिया सवालों की भाषा बोलती है।
तब यही लोग जवाब बनकर खड़े रहते हैं।
जब रास्ते टूटकर अंधेरा बना देते हैं।
तब यही लोग कंधों का पुल बना देते हैं।
भरोसा कोई तैयार खरीदी चीज नहीं है।
यह समय की आग में तपकर बनता है।
मुसीबत की बारिश में भीगकर निखरता है।
टूटने से पहले खुद को बचाता है।
हमारे रिश्ते इत्र की खुशबू जैसे नहीं।
दबाव में महकें और जल्दी खत्म हो जाएँ।
यह रिश्ते बारिश की बूंदों जैसे हैं।
गिरकर मिट्टी में नया जीवन उगाएँ।
यह साथ किसी कागज़ का समझौता नहीं।
जिसे समय आसानी से मिटा सके।
यह वह एहसास है जो गिरने से पहले।
हमें चुपचाप संभाल लेना जानता है।
अगर जीवन थका देने लगे कभी।
तो यही लोग आराम बनकर आते हैं।
अगर डर दिल को घेरने लगे कभी।
तो यही लोग हौसला बनकर गूंजते हैं।
हम सिर्फ अच्छे दिनों के साथी नहीं।
हम बुरे समय की असली पहचान हैं।
हम हँसी में भी साथ मुस्कुराते हैं।
और आँसुओं में भी बराबर खड़े हैं।
यह रिश्ता केवल साँसों तक नहीं रहता।
यह यादों की दुनिया में भी जीवित रहता है।
जीवन के साथ भी चलता हुआ मिलता है।
और जीवन के बाद भी कहानी बन जाता है।
क्योंकि कुछ लोग ईश्वर का जवाब होते हैं।
उन दुआओं का जो हमने कभी माँगी ही नहीं।