जीवन से बड़ी माँग नहीं की कभी।
हर सुबह जीत की ज़िद नहीं की कभी।
जो मिला, उसे सच्चा ही माना।
जो गया, उसने कुछ सिखाया माना।
ज़िंदगी ने सुनी भी, अनसुनी भी की।
खुशी कभी दी, कभी सन्नाटा दिया।
हथेली में कभी रोशनी रख दी।
कभी खाली चुप्पी भी दे दी।
हर दिन नया अध्याय बनकर आया।
कुछ हँसकर खुला, कुछ आँखें भिगो गया।
हर पन्ना मुझे थोड़ा इंसान बना गया।
हर अनुभव समझ का बीज बो गया।
भीड़ नहीं, बस सच्चा साथ चाहिए।
शोर नहीं, बस शांत रिश्ता चाहिए।
बिना बुलाए पास बैठने वाला चाहिए।
बिना कहे दिल पढ़ने वाला चाहिए।
दोस्ती नाम की सूची दिलों की मिली।
मेरी थकान पहचानने वाले लोग मिले।
कामयाबी से पहले दर्द समझने वाले मिले।
चुप्पी के भीतर मुझे पढ़ने वाले मिले।
कुछ लोग साँसों की आदत बन जाते हैं।
धीरे-धीरे दिल के करीब आ जाते हैं।
हर रोज़ बात जरूरी नहीं होती है।
पर बात न हो तो दिन अधूरा होता है।
बड़े वादों का बोझ हमने नहीं रखा।
खाली कसमों का शोर हमने नहीं रखा।
मुश्किल समय में बस साथ खड़े रहे।
पीछे हटने का रास्ता हमने नहीं रखा।
भरोसा बाजार से खरीदा नहीं जाता।
गलतफहमियों की धूप में बनता जाता।
मुसीबत की बारिश में भीगकर पनपता।
टूटकर भी हर बार खड़ा होता जाता।
कुछ रिश्ते इत्र जैसे जल्दी उड़ जाते।
कुछ रिश्ते मिट्टी की खुशबू बन जाते।
थोड़े भारी, पर जीवन उगाने वाले।
गिरकर भी फिर से उठ जाने वाले।
दुनिया उँगली उठाए तो कंधा मिलता है।
आत्मविश्वास टूटे तो हौसला मिलता है।
साथ किसी कागज़ का वादा नहीं है।
यह दिलों की मौन सहमति है।
रात की खामोशी में साथ वही होता है।
जब मन प्रश्नों से घिरा होता है।
नींद जब भविष्य से डर जाती है।
तब अपना पास चुपचाप बैठा होता है।
साथ घड़ी की सुइयों से नहीं चलता।
यह यादों की रफ्तार से बढ़ता चलता।
कुछ लोग वर्तमान में साथ रहते हैं।
कुछ दिल के भीतर हमेशा बसते हैं।
यह रिश्ता जीवन से आगे भी चलता है।
कहानियों और यादों में भी पलता है।
कुछ लोग प्रार्थनाओं का उत्तर होते हैं।
जो शब्दों में कभी कहा नहीं जाता है।