विवाह के बाद जीवन जिम्मेदारियों में ढल गया,
सपनों का विस्तृत आकाश थोड़ा-सा सिकुड़ गया।
बच्चों की हँसी में अपना बचपन जीता रहा,
घर-परिवार के लिए हर दर्द भी पीता रहा।
उम्र बढ़ी, काम और संघर्ष के दिन भी बीत गए,
अपने-पराये रिश्ते भी धीरे-धीरे छूट गए।
साथी, सहकर्मी और दुनिया ने पहचानना कम किया,
जैसे मैं कभी वहाँ था ही नहीं—ऐसा भ्रम दिया।
पर कुछ दोस्त समय की धूप-छाँव में भी साथ रहे,
दिल के गहरे कोनों में वही सदा खास रहे।
ना दोस्ती बूढ़ी हुई, ना यारियाँ रिटायर हुईं,
खुशी और गम की हर घड़ी में वही सहायक हुईं।
तूफानों में कभी नाव बने, कभी पतवार बने,
मुश्किल रास्तों में वही सबसे बड़े हथियार बने।
दूर होकर भी जो दिल के भीतर धड़कते रहे,
मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी दौलत वही बने।
जिम्मेदारियाँ निभाओ, परिवार का मान रखो,
पर सच्ची दोस्ती को हर हाल में पहचान रखो।
उम्र के हर मोड़ पर यारों का साथ संभालो,
थोड़े ही सही, मगर सच्चे दोस्त साथ पालो।
यही जीवन की सबसे अनमोल बचत है,
सच्चे दोस्तों में ही बसती असली जिंदगी है।