आज बच्चों को शोर मचाने दो,
खुलकर हँसने और गाने दो।
कल जब ये बड़े हो जाएँगे,
खामोश ज़िंदगी बिताएँगे।
गेंदों से शीशे तोड़ भी लेने दो,
शरारतों में थोड़ा खो लेने दो।
कल जब ये बड़े हो जाएँगे,
दिल तोड़ेंगे या खुद टूट जाएँगे।
बोलने दो इन्हें बेहिसाब आज,
शब्दों की न रुकने दो कोई आवाज़।
कल जब ये बड़े हो जाएँगे,
शायद इनके होंठ भी सिल जाएँगे।
दोस्तों संग छुट्टियाँ मनाने दो,
खेल-खेल में दिन बिताने दो।
कल जब ये बड़े हो जाएँगे,
दोस्ती और छुट्टी को तरस जाएँगे।
भरने दो सपनों की ऊँची उड़ान,
आकाश छूने का दे दो अरमान।
कल जब ये बड़े हो जाएँगे,
परिंदों की तरह इनके पंख कट जाएँगे।
बनाने दो काग़ज़ की छोटी कश्ती,
बचपन में बसती है ऐसी मस्ती।
कल जब ये बड़े हो जाएँगे,
ऑफिस के काग़ज़ों में खो जाएँगे।
खाने दो जो दिल चाहे इनका,
रोक-टोक से न बांधो सपना।
कल जब ये बड़े हो जाएँगे,
हर निवाले की कीमत गिनाएँगे।
रहने दो इन्हें आज मासूम सदा,
बचपन की दुनिया रहे आबाद सदा।
कल जब ये बड़े हो जाएँगे,
ये भी “समझदार” कहलाएँगे।
आज इन्हें खुलकर जी लेने दो,
खुशियों की बारिश में भीग लेने दो।
कल की चिंता अभी मत लाओ,
मासूम पलों को यूँ ही मुस्काने दो।
इनकी हँसी में दुनिया बसती है,
इनकी खुशी में जीवन की शक्ति है।
बचपन का हर पल अनमोल है,
यही जीवन की सच्ची भक्ति है।
आज इन्हें उड़ने का अधिकार दो,
सपनों को साकार करने का प्यार दो।
कल क्या होगा किसे पता है,
आज बस बचपन को स्नेह अपार दो।