प्रभु, बुढ़ापा ऐसा देना कि जीवन सरल बना रहे,
हलवा-पूरी भी गटक सकूँ और चना भी चबा रहे।
मेरे तन की शुगर कभी भी बढ़ने न पाए,
जुबाँ की मिठास हमेशा यूँ ही कायम रह जाए।
तन का लोहा ठीक रहे, मन में भी शक्ति बनी रहे,
जीवन की हर चुनौती से लड़ने की हिम्मत जगी रहे।
चलूँ हमेशा सीधा-सादा, कमर कभी न झुक जाए,
यारों की हँसी-ठिठोली और मेल-जोल कभी न रुक पाए।
मस्त-मौला बनकर जीऊँ मैं अपने हर दिन और रात,
प्रभु, ऐसा बुढ़ापा देना जिसमें खुशियों की हो बात।
आँखों पर भले ही चश्मा हो, पर पढ़ सकूँ अख़बार,
टीवी की दुनिया भी समझ सकूँ, बना रहे ज्ञान का आधार।
पास हों या फिर दूर रहें मेरे प्रिय मित्र सभी,
बातचीत का सिलसिला रहे, टूटे न अपनापन कभी।
चाट-पकोड़ी, पानी-पूरी का स्वाद भी लेता रहूँ,
चटखारे लेकर जीवन के हर पल को जीता रहूँ।
बीमारी और कमजोरी मुझसे दूर ही रहें सदा,
मेरे जीवन में न आए कोई भारी चिंता या व्यथा।
सावन हरा-भरा रहे और भादों भी सूखा ही रहे,
मन के भीतर शांति का मीठा सा दीपक जलता रहे।
जीवन की शैली पर कोई भी प्रतिबंध न लग पाए,
अपनों के संग हँसते-हँसते जीवन यूँ ही कट जाए।
जीवनसाथी साथ चले, हर सुख-दुख में हाथ रहे,
दोनों मुस्काते रहें, प्रेम का आशीर्वाद साथ रहे।
आत्मसम्मान से कभी भी समझौता न करना पड़े,
अपने सिद्धांतों के आगे सिर कभी न झुकाना पड़े।
जो भी लिखा है भाग्य में, वही स्वीकार कर सकूँ,
जो होना है जीवन में, शांति से उसे सह सकूँ।
ऐसी करनी करूँ कि गर्व से सबको निहार सकूँ,
हर किसी से प्रेमभाव से आँखें मिलाकर बात कर सकूँ।
प्रभु, ऐसा बुढ़ापा देना जिसमें चिंता न सताए,
हृदय में सदा सुकून और संतोष का दीप जलाए।
जीवन के अंतिम पड़ाव पर भी मुस्कान बनी रहे,
आपकी कृपा से मेरी हर साँस सुगम बनी रहे।
बस यही विनती है मेरी, यह दुआ स्वीकार करना,
प्रभु, मुझे ऐसा सुंदर, स्वस्थ बुढ़ापा देना।