हार जाते हैं हम तुम्हें पाने में,
दिल के सपनों को सजाने में।
हर धड़कन पर नाम तुम्हारा,
फिर खुद को समझाने में।
हार जाते हैं तुमको भूलने में,
यादों के दीपक बुझाने में।
तेरी हँसी का साया चलता,
अश्कों को भी छुपाने में।
तेरी बातें गूंजें हवाओं में,
नगमे बनें इन फ़िज़ाओं में।
दिल की धड़कन कहती चुपके,
तुम बसते हो इन दुआओं में।
हर बार सोचा आगे बढ़ेंगे,
रास्ते नए खुद ही गढ़ेंगे।
पर कदम ठिठक जाते फिर से,
तेरे ख्यालों में ही अड़ेंगे।
जज़्बातों से बंधे हुए हैं,
तेरे सपनों में ढले हुए हैं।
शायद प्यार का यही फलसफा,
हर हार में जीत छुपे हुए है।