गुज़ार ही लोगे तुम अपनी ज़िंदगी,
मुझसे तो ये हुनर भी नहीं होता।
तुम बिन जीने का जो सलीका है,
वो मुझको कभी नहीं आता।
हर साँस में बस नाम तुम्हारा,
दिल ने सदा तुम्हें ही पुकारा।
तुम बिन कोई लम्हा ऐसा नहीं,
जो तन्हा दिल ने खुद से सँवारा।
तुम दूर गए पर ख्वाब वही हैं,
यादों के सिलसिले सभी हैं।
दिल से रिश्ता अब भी गहरा,
धड़कनों में बस तुम ही तुम हो ठहरा।
तुमने हँसकर जीना सीख लिया,
दर्द को भी जैसे पीना सीख लिया।
मुझको तो आँसू छुपाना भी,
अब तक ठीक से नहीं आता।
कहते हैं वक्त मरहम रखता,
हर जख्म को धीरे भरता।
पर इस दिल की सच्ची पीड़ा,
कोई समझ नहीं पाता।
भूलने की कोशिश करता हूँ,
खुद से ही रोज़ लड़ता हूँ।
तेरी झलक से जो उजाला था,
वो अब अँधेरों में जलता नहीं जाता।