हम भी चलें अब रौशनी की ओर,
अंधेरों से कर लें नया सा शोर।
सपनों के दीप जलें गगन में,
आशा के रंग भरें जीवन में।
हर ख्वाब को सच करना है,
अपने भीतर दीप धरना है।
कोई तो है जो जाग रहा,
सोई चेतना को जगा रहा।
राहें भले अंधेरी हों,
मन में डर की फेरी हों।
साहस का दीप जलाना है,
हर भय को दूर भगाना है।
कोई तो हाथ बढ़ाएगा,
गिरकर भी हमें उठाएगा।
हर मुश्किल में राह दिखाए,
मंज़िल का संकेत बताए।
वक्त की धारा तीव्र सही,
पर हौसला हमारा कम नहीं।
जज़्बा है सबसे निराला,
जीवन का बने उजाला।
उम्मीद की राह पर बढ़ जाएं,
स्वप्नों को सच कर दिखलाएं।
कोई तो है जो जाग गया,
अब हम भी जागें — यही प्रण लिया।