संबंध की डोरी नाज़ुक सही,
पर विश्वास में अडिग रहती है।
शब्दों से परे एक दुनिया,
जहाँ मौन भी बातें कहती है।
रिक्तता में जो साथ निभाए,
वही सच्चा अपना कहलाए।
शून्य क्षणों की गहराई में,
जो हाथ थामे, वही सहारा बन जाए।
न दिखावे की चकाचौंध हो,
न स्वार्थ का कोई व्यापार।
सादगी में भी जो महके,
वही स्नेह का सच्चा संसार।
जो बिना कहे सब समझे,
आँखों से पढ़ ले दिल की बात।
जिसके होने से सज जाए,
. जीवन की हर एक सौगात।
सुख में तो मिलते हैं सब,
दुख में जो खड़ा वही अपना।
आँधियों में जो दीप बने,
वही रिश्ता सबसे सपना।
अपेक्षा का न हो कोई बोझ,
न मोल-भाव की दीवार।
समर्पण की हो बस धड़कन,
लगाव का पावन विस्तार।
जो टूटे मन को जोड़ सके,
थके कदमों को दे उड़ान।
अंधेरों में जो राह दिखाए,
वही संबंध सच्चा वरदान।
शून्यता में जो फूल खिलाए,
उम्मीदों की कोमल डोर।
विश्वास का दीप जला दे,
जब जीवन लगे चौराहे पर ठौर।
हर मोड़ पर साथ चले जो,
चाहे राहें हों दुश्वार।
डगमग कदमों को थाम ले,
बन जाए साहस का आधार।
न शर्तों में बँधा हो रिश्ता,
न स्वार्थों की हो जंजीर।
मन से मन का हो संवाद,
स्नेह रहे बस गंभीर।
जब सब कुछ पीछे छूट जाए,
और समय भी मुड़ जाए।
जो रिक्तता में भी साथ दे,
वही संबंध अमर कहलाए।
जीवन का असली सार वही,
जो हर दौर में साथ निभाए।
शून्य क्षणों की नीरवता में,
अर्थ नया हर बार रच जाए।