तो करो हमारे इश्क़ में रंगने की आरज़ू,
हम बहके बादलों से फागुन छीन लाएँगे।
तेरे नाम की खुशबू से साँसें महकेंगी,
तेरे इशारों पे मौसम भी झुकाएँगे।
चुप थी हवाएँ अब तक, आज गीत गाएँगी,
तेरी बाहों की छाँव में धूप सो जाएगी।
चाँदनी झूमकर तेरे नग़मे सुनाएगी,
तेरी हँसी से हर रात महफ़िल सजाएगी।
तेरी नज़रों के जादू में रंग जाएगा जहाँ,
फूल खिल उठेंगे, महकेगा आसमाँ।
बस तू इक बार कह दे मुझे अपना सनम,
हम कायनात से तेरा हर रंग ले आएँगे हम।
सावन से माँग लेंगे तेरे लिए बारिशें,
बहारों से चुरा लाएँगे तेरे वास्ते खुशबुएँ।
जो चाहे तू, वही तक़दीर में लिखवा देंगे,
तेरे इश्क़ में हम खुदा से भी भिड़ जाएँगे।
धड़कनों में तेरी चाहत का सुर बसाएँगे,
हर लम्हे को तेरे नाम से सजाएँगे।
तेरे ख्वाबों की राहों पे दीप जलाएँगे,
हर अँधेरे को मिलकर दूर भगाएँगे।
तू बस आरज़ू कर हमारे रंग में ढलने की,
हम बादलों से फिर फागुन छीन लाएँगे।