ख़ुद को इतना भी मत बचाया कर,
बारिश आए तो भीग जाया कर।
चाँद कोई थाली में नहीं देगा,
अपने चेहरे से जगमगाया कर।
दर्द हीरा है, दर्द मोती है,
आँखों से इसे न बहाया कर।
इन लम्हों को सहेज कर दिल में,
अपनी ताक़त बनाया कर।
होंठ हसीन हैं मुस्कान के लिए,
बातों में रस घोल जाया कर।
धूप अगर मायूस लौटे,
छत पे बहाना बन आया कर।
दिल मिलाना मुश्किल सही,
हाथ तो आगे बढ़ाया कर।
तन्हाइयों से यूँ न घबराया,
खुद से भी गुफ़्तगू किया कर।
आईने में झाँक के देख कभी,
खुद को भी सराहा कर।
हर सवाल का जवाब न दे,
कभी चुप रह समझाया कर।
हर मोड़ नई कहानी लाए,
ज़िंदगी को यूँ अपनाया कर।
पगडंडियों से दोस्ती कर,
शहर की दौड़ से छुट्टी लिया कर।
जहाँ दिल को सुकून मिले,
उन राहों पर भी जाया कर।
ख़्वाब सिर्फ़ सोने के नहीं,
उन्हें सच में आज़माया कर।
गिर भी जाए तो शिकवा नहीं,
हर बार खुद को उठाया कर।
जो अपना न बन सका कोई,
खुद से न दूर जाया कर।
दिल की धड़कन कुछ कहती है,
उसकी आवाज़ सुन जाया कर।
सपने सब देखा करते हैं,
तू हौसलों को जगाया कर।
हर सुबह नई शुरुआत है,
कल की फिक्र भुलाया कर।
बीते लम्हों की धूल झाड़,
नए रंगों से सजाया कर।
हँसी को आदत बना ले,
आँसू को कम ही बुलाया कर।
छोटी खुशियों को गले लगा,
रंजिश को दूर भगाया कर।
ये जीवन तेरा अपना है,
इसे खुलकर निभाया कर।
ख़ुद को इतना भी मत रोका कर,
ज़िंदगी को जी भर अपनाया कर।