ये जो न्यामत मिली है मुझे,
ये जो साँसें चल रही हैं।
धड़कनों की मधुर लय में,
मानो वीणा बज रही है।
हर सवेरा सुनहरा लगता,
हर निशा में नूर है।
मेरे जीवन की गागर में,
तेरा ही भरपूर है।
करूँ ईश्वर तेरा शुक्रिया,
हर लम्हा, हर बात पर।
तेरी ही छाया में खड़ा हूँ,
तेरे ही प्रभात पर।
दुःख को तू कफूर करे,
सुख का दे संसार।
हर संकट में बन जाता,
तू मेरा आधार।
तेरा न्याय अपार प्रभु,
तेरी रचना महान।
हर रेखा में लिखा हुआ,
तेरा ही विधान।
कभी आँसू, कभी मुस्कान,
दोनों तेरा खेल।
तेरी लीला अद्भुत लगती,
हर दिन एक नया मेल।
जब-जब गिरा, तूने थामा,
टूटे मन को जोड़ा।
खोया जब खुद को मैंने,
तूने फिर से मोड़ा।
मैं तो धूल बराबर हूँ,
तू ही सच्चा रहबर।
तू ही धरती, तू ही अम्बर,
तू ही मेरा अंबर।
शब्द सभी छोटे पड़ते,
तेरी महिमा गाने को।
तू ही मेरी हर प्रेरणा,
जीवन सजाने को।
शुक्र है तेरे न्याय का,
तेरे पावन विधान का।
तेरी कृपा से ही टिका हूँ,
अपने आत्म-सम्मान का।
अंधियारे में दीप बने,
जब कोई न साथ।
भटकूँ तो तू राह दिखाए,
थकूँ तो दे विश्राम।
भूलूँ तेरा नाम अगर,
फिर भी दे पहचान।
जो भी हूँ मैं आज प्रभु,
सब तेरा ही दान।
तेरी कृपा असीम है,
तेरा प्रेम संजीवनी।
तू ही मेरा सारथी,
तू ही मेरी जीवनी।