मुझ पर दोस्तों का प्यार,
यूँ ही उधार रहने दो।
बड़ा हसीन है ये कर्ज,
मुझे कर्जदार रहने दो।
हर मुलाक़ात में जादू सा है,
हर हँसी में महकती बात है।
उनके बिना ये जिंदगी,
जैसे अधूरी सी किताब है।
इस किताब-ए-ज़िंदगी को,
यूँ ही खुमार रहने दो।
उनकी यादों के पन्नों पर,
रंग हज़ार रहने दो।
जो आँखें छलकती हैं,
ग़म में, खुशी में मेरे लिए।
उन सभी आँखों में सदा,
प्यार बेशुमार रहने दो।
कभी आँसू बन बहती हैं,
कभी दुआ बन कहती हैं।
हर मोती में छुपा हुआ,
रिश्ता बेमिसाल रहने दो।
उन निगाहों का जो नूर है,
जीवन का उजास बनने दो।
उनके संग हर अंधियारा,
रोशन सा एहसास रहने दो।
मौसम चाहे बदलते रहें,
बसंत-पतझड़ आते रहें।
मेरे यारों को उम्र भर,
यूँ ही सदाबहार रहने दो।
बरसातों में भीगती हँसी,
सर्दी की चाय की गर्मी।
हर राह पर साथ कदम,
नाम एक साथ रहने दो।
कभी मनमुटाव, कभी मनुहार,
पर दिलों में न हो दीवार।
दोस्ती का ये मधुर राग,
हर पल त्यौहार रहने दो।
विश्वास की इस बगिया में,
स्वार्थ का बीज न पनपे।
बस अपनापन हर डाली पर,
झूमता हर बार रहने दो।
वो मस्ती, वो शरारतें,
न तुम भूलो, न हम भूलें।
उम्र भले आगे बढ़ती जाए,
दिल का बचपन रहने दो।
क्लास की वो धीमी हँसी,
कैंटीन की अधूरी चाय।
कॉपी में छिपे राज सभी,
बिन कहे समझ जाना रहने दो।
कल हम भले बूढ़े हो जाएँ,
पर दिल जवाँ ही रहने दो।
हमारी दोस्ती को हर दिन,
जीवन का त्योहार रहने दो।
जो रिश्ते दिल से बनते हैं,
वो वक़्त से टूटते नहीं।
बस उनमें थोड़ा सा प्यार,
और यादों का संसार रहने दो।