बहुत समय बाद जब हम यहाँ न होंगे,
हमारी स्मृतियाँ फिर भी हवाओं में होंगी।
हमारा प्रेम, अमिट रंग बनकर,
दिलों पर अपनी छाप रखेगा ठहरकर।
समय हमें इस देह से ले गया सही,
पर सच में हम कहीं खोए नहीं।
हम ठहरे हैं उस संध्या की लहर में,
जहाँ सूरज घुलता है रात के शहर में।
जहाँ भोर की किरण जन्म लेने को है,
पर अंधेरे का आलिंगन भी ढीला न हो।
हम वहीं हैं—
जहाँ न पूरी रोशनी, न पूरा अंधकार।
जहाँ यादें धुंध-सी फैल जाती हैं,
और हर सांस में बीते कल की महक आती है।
तुम यदि चुपचाप आँखें मूंद सको,
तो हमें अपनी धड़कनों में छू सको।
तुम्हारी हथेलियों की गर्माहट में,
तुम्हारी पलकों की नमी की आहट में।
हमारी हँसी अब भी हवा में बहती है,
जैसे कोई पुरानी धुन कहती है।
समय हमें ले गया, पर मिटा न सका,
प्रेम का दीप कभी बुझा न सका।
जब सांझ और भोर के बीच ठहरो,
बैंगनी-सुनहरे आकाश को निहारो।
याद रखना उस शांत क्षण में,
हम वहीं हैं—तुम्हारे हर श्वास-तन में।