लड़के अक्सर बाप को गले नहीं लगाते,
न उसकी गोद में सिर रखकर सो पाते।
बचपन में जो उंगली पकड़कर चलते थे,
बड़े होकर वही फोन पर कम ही मिलते थे।
कभी बाप हीरो था, सबसे बड़ा सहारा,
हर गिरती चाल में उसने थामा था तुम्हारा किनारा।
स्कूल की फीस, नए जूते, बैग और किताबें,
अपनी जरूरतें भूल, पूरी की तुम्हारी ख्वाहिशें बेहिसाब।
वक्त बदला, बेटा जवान हुआ,
सपनों और दुनिया की दौड़ में गुम हुआ।
अब बाप उतना जरूरी नहीं लगता,
क्योंकि “वो तो है ही”—यही भ्रम मन में बसता।
दूर शहर में जब बेटा घर फोन लगाता है,
मां से हंसकर हाल-चाल पूछ जाता है।
उधर कोने में बैठा बाप धीमे से कहता है,
“कह देना उससे, टेंशन ना ले… मैं अभी ज़िंदा हूँ।”
आवाज़ उसकी हल्की है, मगर दिल भारी,
हर शब्द में छिपी है ममता सारी।
वो खुलकर कुछ भी कह नहीं पाता,
पर हर शाम आंगन में तेरा इंतज़ार सजाता।
जब तू साइकिल से गिरता था कभी,
वो दौड़ता था घबराकर तभी।
अब वही बाप छत पर खड़ा राह निहारे,
कि शायद बेटा अचानक सामने आ उतरे।
आंखें कमज़ोर हुईं, पर नजर तुझ पर रहती है,
झुकी कमर में भी उम्मीद सी बहती है।
वो अब भी मानता है तू उसका अभिमान है,
तेरी हर जीत में उसका सम्मान है।
उसे याद हैं तेरी पहली हंसी की रातें,
पहली साइकिल और बचपन की बातें।
मोबाइल पर जब तेरी आवाज़ सुनाई देती है,
वो अपना हर दर्द उसी पल में छुपा लेता है।
“कह देना उससे, मैं बिल्कुल ठीक हूँ,
बस थोड़ी-सी थकान है, और क्या कहूँ।
सीने में दर्द है तो क्या हुआ,
दिल अब भी उसके लिए धड़कता है पूरा।”
कभी लौटकर देख उस बूढ़े चेहरे को,
जिसकी मुस्कान जुड़ी है बस तेरे नाम से।
तू शायद उलझ गया जीवन की राहों में,
पर वो अब भी जुड़ा है तेरे हर कदम की चाहों में।
जब अगली बार घर की देहरी पर आना,
तो केवल मां को ही गले न लगाना।
उस बाप के कंधे पर भी सिर रख देना,
और धीरे से इतना भर कह देना—
“अब तुम टेंशन मत लेना, मैं साथ खड़ा हूँ,
आपके सपनों का आज भी मैं ही बड़ा हूँ।
आप ही से सीखा है हिम्मत का हुनर,
आप ही से पाया है जीवन का सफर।”
क्योंकि वो जो चुपचाप सब सह जाता है,
वही पिता प्रेम का सागर कहलाता है।
उसकी खामोशी को यूँ अनसुना मत करना,
उसके जीते-जी उसे अपना कहना।
कहीं देर न हो जाए इस एहसास में,
कहीं शब्द रह न जाएँ बस इतिहास में।
आज ही गले लगाकर कह देना उसे,
“आप मेरे दिल में हमेशा ज़िंदा हैं।”