जब दुश्मन हर राज़ से बाक़िफ़ हो।
तो समझ लेना दोस्त ग़द्दार है।
मीठी बातों के पीछे जहर छुपा।
ऐसा भी कोई किरदार है।
हर मुस्कान सच्ची नहीं होती।
हर चमक सोने जैसी नहीं होती।
कभी नज़दीकी भी धोखा देती है।
अंदर ही अंदर चोट देती है।
जो ज्यादा अपना बनने लगे।
वही अक्सर दूर जाने लगे।
राज़ अपने सब मत खोलो।
समझदारी की चाबी तोलो।
हर साथी साथ निभाता नहीं।
हर रिश्ता दिल से जाता नहीं।
समय पर सच खुद दिख जाएगा।
भेद भी धीरे खुल जाएगा।
विश्वास बहुत अनमोल है।
पर परखना भी बड़ा बोल है।
जो सच्चा है वही रहेगा।
झूठ का पर्दा गिर ही जाएगा।
सच की राह कठिन जरूर है।
पर यही जीवन का नूर है।