अति के बाद क्षति निश्चित है।
चाहे तुम कितने भी दिग्गज हो।
शक्ति का अहंकार मिट जाता है।
समय का चक्र भी घूम जाता है।
हर चीज़ की सीमा होती है।
जीवन में भी रीति होती है।
जो सीमा पार कर जाता है।
वो अंत में पछताता है।
अधिक बोलना भी भारी होता है।
अधिक सोचना भी दुख देता है।
अति विश्वास भी चोट करता है।
अति मोह भी मन तोड़ता है।
संतुलन ही जीवन की कुंजी है।
यही सबसे बड़ी पूंजी है।
धीरे चलना भी समझदारी है।
शांति में ही खुशहाली है।
अति का रास्ता अंधेरा लाता है।
संयम ही आगे बढ़ाता है।
यही जीवन का सच्चा सार है।
मध्यम मार्ग ही स्वीकार है।