सबके उतने ही रहो जितने वो तुम्हारे हैं।
ज्यादा घुसोगे तो लोग कहते बेचारे हैं।
अपनी हदें भी थोड़ी समझदार रखो।
रिश्तों की प्लेट में संतुलन रखो।
कोई बहुत प्यार दिखाए, तो मुस्काओ।
पर दिल की चाबी जल्दी मत थमाओ।
फोन करे तो दो मिनट बात कर लो।
वरना लोग लंबी डिमांड धर लो।
सबके लिए दिल पूरा खोलना नहीं।
हर किसी को अपना बोलना नहीं।
कुछ लोग चाय जैसे गर्म पसंद करते हैं।
पर बाद में बिना शक्कर के ही चलते हैं।
जो जितना दे, उतना ही लो भाई।
फालतू इमोशन की मत करो कमाई।
ज़्यादा अच्छे बनोगे तो फँस जाओगे।
फिर सबके काम में बस लग जाओगे।
थोड़ी दूरी भी जरूरी होती है।
वरना रिश्तों की हालत बुरी होती है।
सबके उतने ही रहो जितने वो तुम्हारे।
खुश रहोगे, बचेंगे भी झगड़े सारे।