चाहने वालों की भीड़ में आज होड़ मची हुई है,
हर कोई दिल में जगह बनाने की जिद लिए खड़ा है।
किसे अपना समझें और किसे सुकून दे पाएं हम,
हर चेहरा मुस्कुराहट का मुखौटा पहने खड़ा है।
अब हम किसे चाहें, यह सवाल दिल को सताने लगा है,
कौन सच्चा है, यह सोच मन को उलझाने लगा है।
किसी की महफ़िल दिखावे की चकाचौंध से भरी लगती है,
और समय भी सच को पहचानने में देर लगाता है।
कभी कोई अपनी बातों से दिल चुरा ले जाता है,
कभी कोई चुप रहकर भी अपना बना जाता है।
कभी किसी की नजरें प्रेम का एहसास जगाती हैं,
कभी खामोशी भी बहुत कुछ कह जाती है।
चाहने वालों की भीड़ में खुद को खोना नहीं है,
दिल की धड़कनों को अब समझदार बनाना है।
प्यार किसी से भी होना संभव बात है,
पर सच्चाई ही रिश्तों की सबसे बड़ी सौगात है।
दिल वहीँ झुकता है जहाँ गर्माहट का बसेरा है,
जहाँ नियत साफ हो और विश्वास का सवेरा है।
चाहत बिना शोर के ही निभाई जाती है,
सच्चे रिश्तों की पहचान समय से हो पाती है।
इसलिए चाहने वालों की भीड़ चाहे जितनी बढ़ जाए,
दिल वही चुने जहाँ सच्चाई मुस्कुराए।
अब हमारा दिल ही बताएगा किसे चाहना है,
क्योंकि दिल का फैसला ही सबसे सच्चा ठिकाना है।