चुप रहकर जीना भी कोई सच्चा जीवन नहीं होता,
मन की आवाज़ दबाकर इंसान कभी खुश नहीं होता।
जो कहना था अगर दिल की बात कह न सके,
तो शब्दों का पूरा संसार धीरे-धीरे मिटने लगे।
जब सोचने की शक्ति भी मन के भीतर रुक जाती है,
तो इंसान की आत्मा जैसे अंदर ही अंदर झुक जाती है।
जीवन केवल धड़कनों का हिसाब नहीं हुआ करता,
यह जज़्बातों और सपनों का सफर हुआ करता।
जीवन एक सवालों से भरी नदी की तरह बहता है,
हर सपना आकाश की ऊँचाइयों में रहना चाहता है।
जो अपने सपनों से दूर भागते चले जाते हैं,
वे जीवन के असली उजाले को खो जाते हैं।
कहते हैं शरीर एक बार ही अंत को प्राप्त करता है,
पर खामोशी में इंसान बार-बार भीतर ही मरता है।
जो सोचता है, वह अपने जीवन को बदल सकता है,
जो बोलता है सच को, वह खुद को संभाल सकता है।
जो अपने सच्चे स्वर में जीवन जीना जानता है,
वही वास्तव में खुद को जिंदा कहलवाता है।
जब दिल चाहे तो अपनी बात जरूर कहना,
मन उलझे तो अपने विचारों को साफ रखना।
डर और संकोच को कभी मन में जगह न देना,
साहस को ही अपने जीवन का साथी बना लेना।
जिंदगी वहीं है जहाँ हिम्मत साँस लेती है,
सपनों को भी उड़ने की ताकत देती है।
जिंदा वही है जो खुद को खोने नहीं देता है,
जो हिम्मत की भाषा को अपनाकर चलता रहता है।