अस्तित्व चुपके से तुम्हें जगाने की बात करता है,
“उठो, जीवन तुम्हें अपने साथ बुलाता है।”
यदि खुशियों की बरसात जीवन में लानी है,
तो पहले मन के आकाश को साफ़ करना कहानी है।
ब्रह्मांड तुम्हें मुस्कुराते हुए देखना चाहता है,
पर तुम खुद ही दीवारें खड़ी कर लेते हो यहाँ।
जहाँ प्रेम के फूलों को खिलना चाहिए था,
वहाँ डर और शंका का बीज बो देते हो सदा।
जीवन कभी भी इतना कठोर नहीं हुआ करता है,
बस मनुष्य ही अपनी जड़ता में उलझा रहता है।
जो मिला है उसे कम समझकर दुखी होते रहते हैं,
और खोए हुए अतीत में ही अटके रहते हैं।
अपने ही बनाए हुए पिंजरों से बाहर निकल जाओ,
सपनों की नई उड़ान की दिशा में कदम बढ़ाओ।
अस्तित्व कभी थककर रुकने वाला नहीं होता है,
वह तुम्हें हर पल पुकारता ही रहता है।
निस्वार्थ और सरल राहों को अपना साथी बनाओ,
सत्य और प्रेम के पथ पर आगे बढ़ते जाओ।
डर और संशय को मन से धीरे-धीरे हटाओ,
आशा और विश्वास का दीप हृदय में जलाओ।
जीवन का संगीत तभी सुंदर बन पाता है,
जब मन खुशी और शांति से भर जाता है।
इसलिए स्वयं को पहचानो और आगे बढ़ते जाओ,
अस्तित्व की पुकार को जीवन में साकार बनाओ।