जब दुःख के काले बादल जीवन में घिर आते हैं,
और मन के आँगन पर गहरी उदासी छा जाते हैं।
तब साहस का एक दीप हृदय में जलाए रखना,
किसी भी हाल में स्वयं को हारने न देना।
जब शोक की लहरें उठकर मन को घेरने लगें,
और उम्मीद की नाव भी डगमगाने लगें।
तब धैर्य का सहारा लेकर आगे बढ़ते जाना,
जीवन की कठिन धाराओं को पार करते जाना।
कठिन समय ही जीवन का सच्चा शिक्षक होता है,
पथरीली राहों पर चलना भी सिखाता होता है।
मुश्किलों के बीच भी कदम आगे बढ़ाते रहना,
हर हाल में अपने संकल्प को निभाते रहना।
कर्तव्य के मार्ग पर सदा अडिग होकर चलना,
चाहे कितनी भी आँधियाँ क्यों न साथ में पलना।
विश्वास की मजबूत डोर को थामे रखना,
धीरे-धीरे आगे ही आगे बढ़ते रहना।
जो धैर्य और परिश्रम के साथ चलता जाता है,
वह अपने जीवन का सच्चा लक्ष्य पा जाता है।
संकट चाहे कितने भी चारों ओर क्यों न आएँ,
दृढ़ मन से हर बाधा को पार कर जाएँ।
इस जीवन का एक ही सच्चा नियम अपनाना,
संकट से कभी भी मन को न घबराना।
धैर्य, परिश्रम और कर्तव्य के पथ पर चलना,
स्वयं अपना सुंदर भविष्य स्वयं ही गढ़ना।