दुःख और शोक जब भी जीवन में आ जाएँ,
धैर्य का दीप मन के आँगन में जलाए रखें।
आँधियों और तूफानों से कभी न घबराएँ,
मन की लौ को किसी भी हाल में बुझने न दें।
जीवन की राहें सरल नहीं, काँटों से भरी होती हैं,
हर कदम पर यहाँ कठिन परीक्षाएँ खड़ी होती हैं।
जो भय और संशय में रुककर ठहर जाते हैं,
वे अपने ही लक्ष्य के रास्ते से गिर जाते हैं।
सहनशीलता की शाख पकड़कर आगे बढ़ते जाना सीखो,
क्षणिक पीड़ा और हार को जीवन न मानना सीखो।
जिस मिट्टी में आँसू गिरते हैं, फूल वहीं खिलते हैं,
अंधेरी रातों के बाद नए सवेरा भी मिलते हैं।
कर्तव्य का मार्ग ही जीवन का सच्चा तीर्थ कहलाता है,
जहाँ हर यात्री अपने तप और कर्म से निखर जाता है।
स्वार्थ को त्यागकर जो राह पर चलता जाता है,
वही अंत में सम्मान और सफलता पाता है।
न अपमान मन को कभी भी कमजोर करने पाए,
न प्रशंसा का अहंकार दिल में घर करने पाए।
जो सुख-दुःख में समभाव का दीप जलाए रखता है,
वही जीवन के संघर्षों में सच्चा विजयी बनता है।
जब श्रम थकान का भारी बोझ बनकर आने लगे,
और आशा की किरण भी धुंधली सी दिखने लगे।
तब याद रखना हर प्रयास रंग अवश्य लाएगा,
समय के साथ कर्म का फल भी मिल ही जाएगा।
जो गिरकर भी फिर से उठ खड़ा होने का साहस रखे,
दुःख में भी अपने धर्म और सत्य का पथ न छोड़े।
उससे बड़ा वीर जग में और कोई नहीं होता,
धैर्य और कर्म ही मनुष्य का सच्चा गौरव