हर व्यक्ति जीवन में मनचाहे परिणाम चाहता है। वह जो सोचता है, जो कल्पना करता है, उसे हर हाल में पाना चाहता है। पर क्या कभी हमने सोचा है कि हमारे पास जो है, वह क्यों है? मनुष्य वही प्राप्त करता है जिसकी ओर उसका मन आकर्षित होता है—पर शर्त यह है कि वह उसी विषय पर निरंतर सोचें, उसके लिए प्रयास करे और आत्मविश्वास रखे। यदि आप आशा, सफलता, खुशी और समृद्धि चाहते हैं, तो उनके बारे में सोचें, उनके लिए मेहनत करें—वे अवश्य मिलेंगी।
आप वही सोचते हैं, जो आप हैं। इसलिए स्वयं को जानने का प्रयास करें। मानव व्यक्तित्व दो आधारों पर बनता है—वंशानुगत और वातावरण। वंशानुगत गुण माता-पिता से मिलते हैं, परंतु व्यक्तित्व को आकार देने में वातावरण की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। आप जिस माहौल में रहते हैं, जिन लोगों के बीच रहते हैं, जैसी सोच रखते हैं—वैसे ही बन जाते हैं।
आपका जीवन आपकी सोच और विश्वास से आकार लेता है। यदि आप स्वार्थी हैं तो आपको हर व्यक्ति स्वार्थी लगेगा। कई लोग असफल होने पर अपनी कमियों को स्वीकार नहीं करते, बल्कि माता-पिता, भाग्य, समाज या व्यवस्था को दोष देते हैं। कुछ लोग दूसरों की सफलता देखकर ईर्ष्या करते हैं, पर स्वयं दोगुनी मेहनत करने का साहस नहीं जुटाते। वे समर्पण, दृढ़ निश्चय और इच्छाशक्ति को नहीं देखते।
जैसी आपकी सोच होगी, वैसा ही आपका स्वभाव बनेगा और उसी अनुसार परिणाम मिलेंगे। यदि आप ईर्ष्या, क्रोध और घृणा से घिरे रहेंगे, तो जीवन में वही लौटेगा। जीवन की महानता को समझें। किसी की प्रगति रोककर आगे बढ़ना गलत है। आगे बढ़ें, पर अपने विश्वास और परिश्रम से—किसी को गिराकर नहीं।
कोई भी कार्य छोटा नहीं होता। जो स्वयं मेहनत करते हैं, ईश्वर भी उनकी सहायता करता है। छोटी-छोटी बातों को नज़रअंदाज़ न करें। वे जीवन पर गहरा प्रभाव डाल सकती हैं। कभी-कभी मज़ाक में कही गई बातें भी रिश्तों को चोट पहुँचा देती हैं। छोटी गलती भी बड़ा असर डाल सकती है, इसलिए आत्मचिंतन आवश्यक है।
जो स्वयं को नहीं पहचानता, वह संसार को कैसे समझेगा? जब मनुष्य अपनी आंतरिक शक्ति और गुणों को पहचानता है, वही उसके जीवन का महान क्षण होता है। अपने सपनों को केवल सपना न समझें—दृढ़ निश्चय से वे वास्तविकता बन सकते हैं।
जीवन में सफलता के लिए यह जानना जरूरी है कि लोग आपके बारे में क्या सोचते हैं। गलतियों पर पछताने के बजाय उनसे सीखें। आत्मविश्लेषण से आपको अपनी खूबियों और कमियों का ज्ञान होगा। जो व्यक्ति क्रोध, ईर्ष्या और स्वार्थ से भरा है, वह कभी सुखी नहीं हो सकता।
सच्चा इंसान वही है जो स्वयं खुश रहे और दूसरों को भी खुश रखे। याद रखें—रिश्ते तोड़े नहीं जाते, वे अपने आप टूट जाते हैं। जितना प्रेम आप बाँटेंगे, उतना ही प्रेम आपको लौटकर मिलेगा।
किसी विद्वान ने कहा है—
“अच्छी आदतों के बिना चरित्र महान नहीं बन सकता।”
वास्तव में, चरित्र अच्छी आदतों का संग्रह है।