लघु कथा -100

पश्चिम बंगाल के शांत शहर शांतिनिकेतन के पास एक छोटा-सा गाँव था—बेलघरिया। वहीं रहते थे वृद्ध शिक्षक अनिरुद्ध बाबू। वे रिटायर हो चुके थे, पर गाँव के बच्चों को अब भी रोज़ शाम पेड़ के नीचे बैठाकर पढ़ाते थे। उनकी जेब में पैसे कम थे, पर अनुभवों की दौलत बहुत बड़ी।
गाँव में एक लड़का था—रोहन। पढ़ाई में तेज था, पर बहुत अधीर। वह चाहता था कि जल्दी बड़ा आदमी बने, बड़ा घर हो, बड़ी गाड़ी हो। उसे छोटे कामों से चिढ़ थी। वह कहता,
“इन छोटी-छोटी बातों से क्या होगा? कुछ बड़ा करना चाहिए।”
एक दिन रोहन ने देखा कि अनिरुद्ध बाबू सड़क किनारे गिरे एक घायल पंछी को उठा रहे हैं। रोहन बोला,
“बाबू, इस छोटे से पंछी के लिए इतना समय क्यों खराब कर रहे हैं? इससे दुनिया थोड़े बदल जाएगी।”
अनिरुद्ध बाबू मुस्कराए,
“दुनिया बदले या न बदले, इस पंछी की दुनिया तो बदल जाएगी।”
रोहन चुप हो गया, पर बात उसके मन में बैठ नहीं पाई।
कुछ दिनों बाद गाँव में बारिश के कारण कच्ची सड़क टूट गई। स्कूल जाने वाले बच्चों को बहुत परेशानी होने लगी। रोहन ने सोचा—यह सरकार का काम है, हम क्या कर सकते हैं। लेकिन उसने देखा कि अनिरुद्ध बाबू रोज़ दो-तीन पत्थर लाकर गड्ढों में भर देते थे।
रोहन हँसते हुए बोला,
“बाबू, आपके दो पत्थर से क्या होगा? पूरी सड़क तो नहीं बन जाएगी।”
अनिरुद्ध बाबू ने कहा,
“अगर हर आदमी दो पत्थर डाल दे, तो सड़क बन जाएगी।”
अगले दिन रोहन ने भी मज़ाक में दो पत्थर डाल दिए। फिर उसके दोस्त ने भी, फिर कुछ और बच्चों ने भी। एक हफ्ते में रास्ता चलने लायक हो गया। रोहन हैरान था—छोटा काम, पर बड़ा असर।
एक और दिन रोहन ने देखा कि बाबू हर सुबह अपनी दुकान से अखबार लेने वाले दुकानदार को मुस्कराकर धन्यवाद कहते हैं। रोहन ने पूछा,
“बाबू, इसमें क्या खास बात है?”
बाबू बोले,
“मुस्कान मुफ्त होती है, पर किसी का दिन बना सकती है।”
उसी दिन रोहन ने भी पहली बार बस कंडक्टर से मुस्कराकर बात की। कंडक्टर ने उसे बिना चिढ़े सही स्टॉप बता दिया। रोहन को अच्छा लगा।
सबसे बड़ा सबक उसे तब मिला, जब गाँव में एक बूढ़ी विधवा बीमार पड़ी। कोई उसके पास नहीं जाता था। अनिरुद्ध बाबू रोज़ उसके लिए थोड़ा खाना ले जाते। एक दिन रोहन भी साथ गया। बूढ़ी अम्मा ने कांपते हाथों से उसका सिर छुआ और बोली,
“बेटा, आज किसी ने मुझे इंसान समझा।”
रोहन की आँखें भर आईं। उसे लगा कि वह बड़े सपनों में उलझकर छोटे इंसानों को भूल गया था।
शाम को रोहन ने अनिरुद्ध बाबू से कहा,
“बाबू, मुझे समझ आ गया। बड़े बदलाव छोटे कामों से ही शुरू होते हैं।”
अनिरुद्ध बाबू मुस्कराए,
“बिलकुल। छोटी बातों को जो सम्मान देता है, वही बड़ी बातें समझ पाता है।”
अब रोहन हर दिन कोई न कोई छोटा अच्छा काम करने लगा—कभी किसी बच्चे को पढ़ा देता, कभी किसी बूढ़े का थैला उठा देता, कभी रास्ते से कचरा हटा देता।
उसके सपने अब भी बड़े थे, पर उसका दिल पहले से बड़ा हो गया था। और वह समझ गया था—
छोटे किस्से ही एक दिन बड़ी कहानी बनाते

Published by

Unknown's avatar

Rajeev Verma

Thanks For watching. Note:- ALL THE IMAGES/PICTURES SHOWN IN THE VIDEO BELONGS TO ME. I AM THE OWNER OF ANY PICTURES SHOWED IN THE VIDEO ! DISCLAIMER: This Channel DOES NOT Promote or encourage Any illegal activities , neither any services of any child is taken in this video making, all contents provided by this Channel is meant for Sharing Knowledge and awareness for health only . Rajeev Verma #HealthyFeasting. I Loves to post videos on Preventive Health Maintenance Food Recipes. Subscribe my YouTube Channel NOW. http://www.youtube.com/c/HealthyFeasting

Leave a comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.