अनिल और कमला, दिल्ली के एक पुराने मोहल्ले में रहते थे। उनके बाल अब सफ़ेद हो चुके थे, पीठ में थोड़ी सी झुकान आ गई थी, और हाथ थकान से झूलते थे। लेकिन उनका दिल जवान था, और सोच हमेशा दूसरों के लिए तत्पर रहती थी।
एक दिन सुबह-सुबह अनिल अपने छोटे से आंगन में बैठकर चाय पी रहे थे। उनके सामने छोटा सा चिड़ियाघर सा लगने वाला बगीचा था, जहाँ कुछ पड़ोसी अपने पौधों की देखभाल कर रहे थे। तभी कमला ने देखा कि पास के घर की वृद्ध महिला, रुक्मिणी अम्मा, झाड़ियों के पास बैठकर रो रही हैं।
“अनिल, देखो! रुक्मिणी अम्मा कुछ परेशान लग रही हैं,” कमला ने कहा।
अनिल ने अपनी चाय का घूँट लिया और बोला, “चलो, हम उनके पास चलते हैं। इंसान के रूप में जन्म मिले हैं, तो दुःख-सुख साझा करना हमारी जिम्मेदारी है।”
वे दोनों धीरे-धीरे रुक्मिणी अम्मा के घर पहुंचे। कमला ने उनके हाथ पकड़कर कहा, “अम्मा, क्या हुआ? आप रो क्यों रही हैं?”
रुक्मिणी अम्मा ने कहा, “मेरे बेटे ने घर छोड़ दिया है, और कोई भी मुझे समझने नहीं आता। मैं बहुत अकेली महसूस कर रही हूँ।”
अनिल ने मुस्कुराते हुए कहा, “अम्मा, दुःख बंटाने से हल्का हो जाता है। हम आपके साथ हैं। आइए, बैठिए और थोड़ी चाय पीजिए।”
कमला ने उनके लिए गर्म रोटियाँ और हल्का खाना तैयार किया। अनिल ने ध्यान से सुना कि रुक्मिणी अम्मा की समस्या सिर्फ़ अकेलापन और निराशा थी। उन्होंने अपने अनुभव और कहानियों के माध्यम से उन्हें समझाया कि हर समस्या का समाधान होता है, और हर दुःख कुछ सिखाता है।
अम्मा के चेहरे पर धीरे-धीरे मुस्कान लौट आई। उन्होंने कहा, “आप दोनों का दिल सचमुच बहुत बड़ा है। आपके आने से मुझे फिर से जीवन की उम्मीद मिली।”
अनिल ने धीरे-धीरे कहा, “इन्सान के रूप में जन्म मिले हैं, लेकिन असाधारण बनने का तरीका यह है कि दूसरों के दुःख-सुख को अपने हृदय से महसूस करो, और मदद करो। हम हर किसी का दुःख दूर नहीं कर सकते, लेकिन प्रतिक्रिया और प्रयास हमारे हाथ में हैं।”
कमला ने भी सहमति में सिर हिलाया। “हर छोटी मदद, हर छोटा शब्द, कभी-कभी किसी की पूरी दुनिया बदल देता है।”
उस दिन से अनिल और कमला हर दिन पड़ोसियों से मिलने जाते। वे किसी की समस्या हल कर दें या न करें, लेकिन उनका प्रयास और उनकी दया सभी को महसूस होती। बच्चों से लेकर बुज़ुर्ग तक, सब उनकी छोटी-छोटी मदद को याद रखते थे।
उनका जीवन साधारण था, लेकिन उनके दिल की भव्यता और मानवीय संवेदनशीलता उन्हें असाधारण बनाती थी। मोहल्ले के लोग अक्सर कहते, “अनिल और कमला जैसी आत्मा हमें इंसान होने का मतलब याद दिलाती है।”
और सच में, इन्सान के रूप में जन्म लेना एक अवसर है, लेकिन औरों के दुःख-सुख को महसूस करना, मदद करना, और मंगलकामनाएँ देना—यही असली उपहार है।