लघु कथा – 22

विक्रम की जिंदगी पिछले कुछ सालों से केवल संघर्ष और तनाव का नाम रह गई थी। वह एक छोटे से शहर में रहता था, जहाँ उसने अपने सपनों को पूरा करने के लिए कई उधार लिए थे। घर बनवाने के लिए, छोटे व्यवसाय को शुरू करने के लिए, बच्चों की पढ़ाई के लिए—हर कदम पर उसने ऋण लिया।
लेकिन अब वह ऋणों के जाल में फंसा हुआ महसूस करता था। बैंक के कॉल, सख्त नोटिस, और पैसे की कमी ने उसके मन को इतना बेचैन कर दिया था कि रातों को नींद नहीं आती थी। दिन में भी वह काम में ध्यान नहीं लगा पाता। हर समय सिर पर कर्ज का बोझ महसूस होता और दिल बेचैनी से भर जाता।
विक्रम अक्सर अपने दोस्तों से कहता,
“सब कुछ खत्म हो जाएगा। मैं अब संभल नहीं पा रहा हूँ। यह जीवन क्यों इतना कठिन है?”
एक दिन, विक्रम के पिता ने उसे देखकर चुपचाप उसके पास आकर बैठ गए।
“बेटा,” उन्होंने धीरे कहा, “जीवन तब सरल हो जाता है जब हम विरोध छोड़कर प्रवाह में जीते हैं। जैसे पानी धीरे-धीरे पत्थर को तराशता है, वैसे ही शांत मन और निरंतर प्रयास तुम्हारे जीवन का स्वरूप बदल सकते हैं।”
विक्रम ने सिर झुकाया, “लेकिन पापा, यह ऋण, यह दबाव… मुझे लगता है कि मैं डूब रहा हूँ। मैं कहाँ से शुरू करूँ?”
पिता ने हाथ से उसके कंधे को थपथपाया।
“सबसे पहले डर और विरोध को छोड़ो। हर ऋण, हर कठिनाई पर ध्यान न दो। पहले अपने मन को शांत करो। फिर कदम-दर-कदम योजना बनाओ। छोटे प्रयास भी निरंतर रहें, तो प्रवाह धीरे-धीरे दिशा बदल देता है।”
विक्रम ने उस रात पहली बार बिना बेचैनी के सोने की कोशिश की। सुबह उठकर उसने कागज़ और कलम लिया और अपनी सारी आर्थिक स्थिति लिखी। उसने ऋणों को प्राथमिकता के आधार पर बांटा—सबसे जरूरी से सबसे कम जरूरी तक। उसने देखा कि कुछ ऋण पर वह समय से निपट सकता था, कुछ के लिए उसे अतिरिक्त काम करना होगा।
विक्रम ने हर दिन एक योजना बनाई और उसका पालन किया। उसने छोटे व्यवसाय को व्यवस्थित किया, कुछ अतिरिक्त काम लिया और अपने खर्च पर नियंत्रण रखा। धीरे-धीरे, ऋणों का बोझ कम होने लगा।
सबसे महत्वपूर्ण बदलाव उसके मन में हुआ। पहले हर ऋण, हर नोटिस उसे तनाव और विरोध की ओर खींचता था। अब वह उन्हें चुनौती समझकर संयम और निरंतर प्रयास के साथ देखता। उसका मन शांत हुआ, और सोच स्पष्ट हुई।
कुछ महीनों बाद, विक्रम ने देखा कि न केवल आर्थिक स्थिति बेहतर हुई, बल्कि उसका जीवन भी संतुलित और सरल लगने लगा। वह समझ गया कि जीवन का असली परिवर्तन बाहरी परिस्थितियों से नहीं, बल्कि मानसिक स्थिति और निरंतर प्रयास से आता है।
विक्रम ने पिता से मुस्कराते हुए कहा,
“आप सही कह रहे थे, पापा। जब मन शांत रहता है और निरंतर प्रयास होता है, तो कठिनाई भी मार्गदर्शक बन जाती है। जीवन वास्तव में प्रवाह में सरल हो गया है।”
और इसी समझ ने विक्रम को यह सिखाया—विरोध छोड़ दो, प्रवाह में जीओ, और लगातार प्रयास करते रहो। मुश्किल समय भी धीरे-धीरे रास्ता बनाता है।

Published by

Unknown's avatar

Rajeev Verma

Thanks For watching. Note:- ALL THE IMAGES/PICTURES SHOWN IN THE VIDEO BELONGS TO ME. I AM THE OWNER OF ANY PICTURES SHOWED IN THE VIDEO ! DISCLAIMER: This Channel DOES NOT Promote or encourage Any illegal activities , neither any services of any child is taken in this video making, all contents provided by this Channel is meant for Sharing Knowledge and awareness for health only . Rajeev Verma #HealthyFeasting. I Loves to post videos on Preventive Health Maintenance Food Recipes. Subscribe my YouTube Channel NOW. http://www.youtube.com/c/HealthyFeasting

Leave a comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.