मैं बहुत Busy हूँ—
इतना कि फुर्सत को
व्हाट्सऐप पर भी
Seen नहीं कर पाता।
सुबह उठा तो Busy,
ब्रश करते-करते Busy,
नहाते वक्त सोचा—
“आज आराम करूँ?”
दिमाग़ बोला—
“माफ़ करना, पूरा दिन Busy रखा है।”
फोन आया—माँ का,
मैंने कहा—“अभी मीटिंग है।”
मीटिंग कहाँ?
बिस्तर पर लेटे-लेटे
WhatsApp ग्रुप में
“Good Morning” फॉरवर्ड कर रहा था—
पर भाई, Busy तो था!
दोस्त बोला—
“चल चाय पीते हैं।”
मैंने कहा—
“आज बिल्कुल टाइम नहीं है।”
फिर आधा घंटा
रील्स देखते हुए
सोचता रहा—
“यार, लोग कितने फालतू होते हैं!”
ऑफिस में Busy दिखना
सबसे ज़रूरी कला है—
कंधे पर बैग,
चेहरे पर तनाव,
और स्क्रीन पर खुला हुआ
वही Excel
जो तीन दिन से Save भी नहीं हुआ।
बीवी बोली—
“थोड़ा टाइम दो।”
मैंने कहा—
“देखो, बहुत Busy हूँ।”
फिर रात को पूछा—
“डिनर क्यों ठंडा है?”
उसने कहा—
“तुम्हारे Busy होने की वजह से।”
Busy होने का
एक फ़ायदा ज़रूर है—
कोई ज़िम्मेदारी नहीं,
कोई सवाल नहीं,
बस एक बहाना—
“यार, टाइम ही नहीं है!”
पर सच बताऊँ तो—
Busy हम काम से नहीं,
डर से होते हैं—
खुद से मिलने के डर से,
खाली बैठकर
ज़िंदगी से सवाल पूछने के डर से।
कभी-कभी सोचता हूँ—
अगर सच में फ्री हो गया,
तो क्या करूँगा?
शायद
थोड़ा जी लूँगा,
और फिर कहूँगा—
“आज ज़िंदगी के साथ Busy हूँ।”