एक छोटा-सा बिंदु
एक बड़े वाक्य को रोक सकता है।
सब कुछ कह देने के बाद भी
वह कह देता है—
“यहीं समाप्त।”
कभी-कभी जीवन भी
ऐसा ही बिंदु रख देता है
हमारे सपनों के बीच—
अचानक, बिना चेतावनी।
पर क्या तुमने कभी
तीन बिंदुओं को देखा है…?
वे कहते नहीं—
वे इशारा करते हैं।
वे रुकते नहीं—
वे आगे की संभावना छोड़ते हैं।
…
यही हैं वे बिंदु
जो अंत को
निरंतरता में बदल देते हैं।
अद्भुत है,
पर सत्य यही है—
रुकना हार नहीं,
ठहरना समझदारी है।
एक बिंदु
डर सिखाता है,
तीन बिंदु
उम्मीद जगाते हैं।
जहाँ सब कुछ समाप्त लगता है,
वहीं से
नया वाक्य जन्म लेता है।
नई भाषा,
नया अर्थ,
नया साहस।
याद रखो—
हर अंत
पूर्ण विराम नहीं होता।
कभी-कभी
वह सिर्फ़
तीन बिंदु होता है…
जो कहता है—
कहानी अभी बाक़ी है।