जागो!
क्योंकि सूरज रोज़ नहीं पूछता
कि तुम थके हो या हारे हुए,
वह बस निकल आता है
और कहता है—
“आज फिर एक मौका है।”
जागो!
नींद सिर्फ़ आँखों में नहीं,
सोच में भी होती है,
जहाँ डर तकिये बन जाते हैं
और सपने
अलार्म की आवाज़ से भी नहीं जागते।
जियो!
सिर्फ़ साँस लेकर नहीं,
बल्कि सवाल पूछकर—
“क्या यही ज़िंदगी थी
जिसके लिए मैं बना था?”
जियो उस हँसी के साथ
जो कारण नहीं माँगती,
उस मेहनत के साथ
जो तारीफ़ की भूखी नहीं होती।
गिरो,
पर गिरने से पहले
डर से मत बैठो।
क्योंकि ज़मीन
सिर्फ़ गिरने वालों को
खड़े होने का अर्थ सिखाती है।
और फिर—
आनंदित हो जाओ।
हर जीत पर नहीं,
हर कोशिश पर।
हर मंज़िल पर नहीं,
हर कदम पर।
जब रास्ता कठिन हो,
तो गुनगुनाओ,
क्योंकि आनंद
परिस्थितियों से नहीं,
दृष्टि से पैदा होता है।
याद रखो—
कल एक कहानी है,
कल एक संभावना है,
पर आज
एक उत्सव है।
तो जागो,
अपने भीतर सोई
हिम्मत को पुकारो।
जियो,
अपने डर से बड़ा सपना चुनो।
और आनंदित हो जाओ—
क्योंकि जीवन
समस्या नहीं,
एक अद्भुत अवसर है।