आप फिर कभी इस उम्र में नहीं होंगे — जो आपको खुश रखे, वही करें


राजीव वर्मा

जीवन केवल एक ही दिशा में चलता है—आगे की ओर। हर गुजरता हुआ दिन हमें हमारे उस रूप से दूर ले जाता है, जो फिर कभी लौटकर नहीं आएगा। आज आपकी जो उम्र है, उसके साथ जुड़ी ऊर्जा, अनुभव, सीमाएँ और संभावनाएँ—यह सब दोबारा नहीं मिलेंगी। यह सच्चाई डराने के लिए नहीं है, बल्कि हमें जगाने के लिए है। आप फिर कभी इस उम्र में नहीं होंगे—इसलिए वही करें जो आपको सच में खुश रखे।
अक्सर लोग खुशी को टालते रहते हैं। वे सोचते हैं, “जब यह हासिल कर लूँगा, तब खुश रहूँगा,” या “सब कुछ ठीक हो जाने के बाद अपने मन की करूँगा।” लेकिन जीवन रुकता नहीं है। समय बिना शोर किए आगे बढ़ता रहता है, और “सही समय” का इंतज़ार करते-करते हम असली समय को खो देते हैं। खुशी कोई मंज़िल नहीं है, जिसे सब कुछ पूरा होने के बाद पाया जाए; यह एक रोज़ का चुनाव है—अपने आज के साथ ईमानदार रहने का।


‘बाद में’ का भ्रम
वयस्क जीवन का सबसे बड़ा भ्रम यह होता है कि हमारे पास हमेशा समय रहेगा—यात्रा करने का, कुछ नया सीखने का, अपने सपनों के पीछे जाने का, अपने लोगों को समय देने का। भविष्य की योजना बनाना ज़रूरी है, लेकिन अगर हम वर्तमान की बलि देकर भविष्य के सपने देखते रहें, तो जीवन धीरे-धीरे नीरस हो जाता है।


हर उम्र की अपनी ताकत होती है। आज आप जो कर सकते हैं—शारीरिक रूप से, मानसिक रूप से, भावनात्मक रूप से—वह शायद बाद में उतना आसान न हो। आपकी वर्तमान उम्र में अनुभव और ऊर्जा का जो अनोखा मेल है, वह एक उपहार है। इस उपहार को “किसी और दिन” के लिए टाल देना, अपने ही जीवन से दूरी बना लेना है।


खुशी व्यक्तिगत होती है, सार्वभौमिक नहीं
जो आपको खुश करता है, ज़रूरी नहीं कि वही दूसरों को समझ आए—और इसमें कोई बुराई नहीं है। समाज सफलता की कुछ तय परिभाषाएँ थोप देता है—एक खास करियर, एक खास जीवनशैली, एक तय समय-सीमा। लेकिन खुशी किसी तय ढाँचे में नहीं बंधती।


किसी के लिए खुशी घूमने में है, किसी के लिए स्थिर जीवन में। कोई अकेले रहकर खुश रहता है, तो कोई लोगों के बीच। कोई अपने सपनों को खुलकर जीता है, तो कोई उन्हें शांति से। जब आप अपनी खुशी की तुलना दूसरों की ज़िंदगी से करना बंद कर देते हैं, तभी आप सच में आज़ाद होते हैं। आप दूसरों की अपेक्षाएँ पूरी करने के लिए नहीं आए हैं, बल्कि अपनी सच्चाई के साथ जीने के लिए आए हैं।


डर स्वाभाविक है, पछतावा वैकल्पिक
खुशी और हमारे बीच अक्सर डर खड़ा होता है—लोग क्या कहेंगे, असफल हो गए तो क्या होगा, बदलाव से क्या बिगड़ जाएगा। डर इंसानी है, लेकिन अगर वही हमारे फैसले तय करने लगे, तो उसकी कीमत हमें चुकानी पड़ती है—पछतावे के रूप में।


ज़्यादातर लोग उन चीज़ों का पछतावा नहीं करते जो उन्होंने कोशिश करके देखीं, बल्कि उनका पछतावा उन मौकों का होता है जिन्हें उन्होंने कभी आज़माया ही नहीं। जीवन के आख़िरी पड़ाव पर लोग यह नहीं सोचते कि काश उन्होंने ज़्यादा काम किया होता, बल्कि यह सोचते हैं कि काश उन्होंने अपने दिल की सुनी होती।


डर को खत्म करना ज़रूरी नहीं है—बस अपनी खुशी को डर से ज़्यादा महत्व देना ज़रूरी है। छोटी खुशियाँ भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं जो आपको खुश रखे, वह हमेशा कोई बड़ा फैसला या बड़ा बदलाव नहीं होता। कई बार खुशी छोटी-छोटी बातों में छुपी होती है—अपने शौक के लिए समय निकालना, सही लोगों के साथ रहना, बिना अपराध-बोध के आराम करना, या जब ज़रूरी हो तब ‘ना’ कहना।


जब आप अपनी ज़रूरतों का सम्मान करते हैं, तब खुशी पनपती है। जब आप खुद को साबित करने के लिए खुद को थकाना बंद करते हैं। जब आप बिना सफ़ाई दिए जीवन का आनंद लेना सीखते हैं। छोटी खुशियाँ, अगर रोज़ चुनी जाएँ, तो एक संतुष्ट जीवन बना देती हैं।


उम्र कोई सीमा नहीं है
बहुत से लोग सोचते हैं कि वे कुछ नया शुरू करने के लिए या तो बहुत छोटे हैं या बहुत बड़े। लेकिन हर उम्र की अपनी शक्ति होती है। जवानी में ऊर्जा और जिज्ञासा होती है, परिपक्वता में समझ और अनुभव।


जो चीज़ लोगों को रोकती है, वह उम्र नहीं, बल्कि सोच होती है। यह मान लेना कि अच्छे दिन पीछे छूट गए हैं, जीवन को वहीं रोक देता है। लेकिन जब आप यह तय करते हैं कि आपकी मौजूदा उम्र एक अवसर है, बोझ नहीं, तब ज़िंदगी नए दरवाज़े खोलती है।


समय ही वह चीज़ है जो लौटकर नहीं आती
पैसा फिर कमाया जा सकता है। रिश्ते सुधारे जा सकते हैं। गलतियों से उबरा जा सकता है। लेकिन समय—एक बार चला गया, तो हमेशा के लिए चला जाता है। इसलिए सचेत होकर जीना ज़रूरी है।


खुशी चुनने का मतलब जिम्मेदारियों से भागना नहीं है। इसका मतलब है—जिम्मेदारियों के बीच भी अर्थपूर्ण जीवन चुनना। इसका मतलब है—बीमारी, थकावट या किसी नुकसान के बाद जागने के बजाय, अभी से अपनी प्राथमिकताओं को समझना।


खुशी चुनना साहस का काम है
अपनी खुशी के अनुसार जीना आसान नहीं होता। इसके लिए साहस चाहिए। कभी-कभी इसका मतलब होता है—दूसरों को निराश करना, रास्ता बदलना, या कुछ समय अकेले चलना। लेकिन साहस का मतलब मुश्किलों का न होना नहीं, बल्कि यह तय करना है कि आपकी ज़िंदगी पूरी तरह जीने लायक है।


जब आप खुशी चुनते हैं, तो आप दूसरों के लिए भी रास्ता खोलते हैं। आप दिखाते हैं कि ईमानदारी, आत्मसम्मान और आनंद के साथ जीना संभव है।


इस पल का सम्मान करें
आप फिर कभी इस उम्र में नहीं होंगे। आप जैसा आज हैं—अपने सपनों, संघर्षों, ताकत और संभावनाओं के साथ—यह रूप सिर्फ़ एक बार मिलता है।


जो आपको खुश रखे, वही करें। कल के लिए नहीं, परफेक्ट हालात के लिए नहीं—आज, अभी। छोटी या बड़ी—खुशी के चुनाव करें। दूसरों की मंज़ूरी से ज़्यादा अपनी सच्चाई को चुनें। क्योंकि एक दिन आप पीछे मुड़कर देखेंगे और आज के फैसलों को याद करेंगे। कोशिश करें कि वे यादें साहस, संतोष और खुशी से भरी हों।

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Rajeev Verma

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