जब आपकी तरक्की दूसरों को असहज कर देती है

राजीव वर्मा
जीवन की यात्रा में एक ऐसा मोड़ अक्सर आता है, जब आपकी मेहनत, आत्मविश्वास और प्रगति कुछ लोगों को खुश करने के बजाय असहज कर देती है। जो लोग कभी आपके साथ थे, वही आपकी सफलता को चुपचाप नापसंद करने लगते हैं। यह स्थिति भ्रमित करने वाली भी होती है और दर्दनाक भी। लेकिन सच यह है कि आपकी तरक्की आपकी गलती नहीं होती, बल्कि दूसरों की असुरक्षा का आईना होती है।


जीवन की यात्रा में एक ऐसा मोड़ अक्सर आता है, जब आपकी मेहनत, आत्मविश्वास और प्रगति कुछ लोगों को खुश करने के बजाय असहज कर देती है। जो लोग कभी आपके साथ थे, वही आपकी सफलता को चुपचाप नापसंद करने लगते हैं। यह स्थिति भ्रमित करने वाली भी होती है और दर्दनाक भी। लेकिन सच यह है कि आपकी तरक्की आपकी गलती नहीं होती, बल्कि दूसरों की असुरक्षा का आईना होती है।


विकास की रोशनी और असहजता की छाया
जब कोई व्यक्ति आगे बढ़ता है, अपने विचारों में स्पष्टता लाता है, आत्मनिर्भर बनता है और सीमाएँ तय करता है, तो उसकी उपस्थिति स्वयं में एक संदेश बन जाती है। यह संदेश उन लोगों को असहज करता है जो अब तक आरामदायक जड़ता में जी रहे थे। आपकी ग्रोथ उन्हें उनके अधूरे सपनों, छोड़ी हुई कोशिशों और अधूरी हिम्मत की याद दिलाती है।
यह असहजता ईर्ष्या नहीं होती, बल्कि आत्मसंघर्ष की पीड़ा होती है। लोग आपकी प्रगति को नहीं, बल्कि अपने ठहराव को देखकर बेचैन होते हैं।


बदलते रिश्तों की सच्चाई
तरक्की के साथ रिश्तों का बदलना स्वाभाविक है। जो लोग आपके संघर्ष के दिनों में आपके साथ थे, जरूरी नहीं कि वे आपकी उड़ान के साक्षी भी बन सकें। कुछ लोग आपको वहीं देखना चाहते हैं जहाँ वे आपको समझते थे—कमज़ोर, निर्भर या सीमित।


जब आप आगे बढ़ते हैं, तो आपकी सीमाएँ स्पष्ट हो जाती हैं। आप हर बात पर सहमत होना छोड़ देते हैं, हर उम्मीद को पूरा करना बंद कर देते हैं। यही बदलाव कुछ लोगों को असहज कर देता है, क्योंकि अब आप उनकी सुविधा का हिस्सा नहीं रहते।


चुप्पी और आलोचना का खेल
जब लोग सीधे आपका सामना नहीं कर पाते, तो वे आलोचना का सहारा लेते हैं। आपकी मेहनत को “किस्मत” कह दिया जाता है, आपकी सफलता को “संयोग”। आपकी सोच को “अहंकार” और आपकी शांति को “दूरी” का नाम दे दिया जाता है।


यह आलोचना आपके चरित्र पर नहीं, बल्कि उनकी असहजता का प्रमाण होती है। चुप्पी भी एक भाषा है—जब आपके आगे बढ़ने से कुछ लोग खामोश हो जाएँ, तो समझिए कि आपकी प्रगति ने उन्हें बोलने का साहस नहीं छोड़ा।


स्वयं को छोटा न करें
सबसे बड़ा खतरा तब होता है जब आप दूसरों की असहजता को कम करने के लिए खुद को छोटा करने लगते हैं। आप अपनी रोशनी मंद कर देते हैं, अपने सपनों को सीमित कर लेते हैं, सिर्फ इसलिए कि कोई और असहज न हो।


याद रखिए—आपका विकास किसी की अनुमति से नहीं होता। खुद को सीमित करना न तो रिश्ते बचाता है और न ही सम्मान। जो लोग आपकी रोशनी से असहज होते हैं, वे अंधेरे में ही आराम महसूस करते हैं।


सच्चे समर्थक कौन होते हैं
हर कोई आपकी ग्रोथ से असहज नहीं होता। कुछ लोग होते हैं जो आपकी सफलता में अपनी प्रेरणा ढूँढते हैं। वे आपकी उड़ान देखकर अपने पंखों को पहचानते हैं। यही लोग आपके असली समर्थक होते हैं।


सच्चे लोग आपकी तरक्की से डरते नहीं, बल्कि उससे सीखते हैं। वे आपको आगे बढ़ते देखकर खुश होते हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि आपकी सफलता उनकी असफलता नहीं है।


आत्मसम्मान और आंतरिक मजबूती
जब आपकी ग्रोथ दूसरों को असहज करे, तब सबसे ज़रूरी होता है आत्मसम्मान को संभालना। आपको बार-बार खुद से यह याद दिलाना पड़ता है कि आपने यह रास्ता मेहनत, ईमानदारी और साहस से तय किया है।


आपकी शांति, आत्मनिर्भरता और स्पष्ट सोच आपकी सबसे बड़ी ताकत हैं। जब आप खुद के साथ ईमानदार रहते हैं, तो बाहरी शोर आपको डिगा नहीं सकता।


अकेलापन: विकास का साथी
अक्सर ग्रोथ के साथ अकेलापन आता है। यह अकेलापन सज़ा नहीं, बल्कि चयन होता है। आप उन भीड़भाड़ वाले रिश्तों से दूर हो जाते हैं जहाँ समझ की जगह अपेक्षाएँ थीं।
यह अकेलापन आपको खुद से जोड़ता है। यहीं आप अपनी आवाज़ सुनते हैं, अपनी दिशा तय करते हैं। हर ऊँचाई पर भीड़ नहीं होती, लेकिन दृश्य सबसे साफ़ होता है।
करुणा रखें, लेकिन दिशा न बदलें


यह आवश्यक नहीं कि आप उन लोगों से कटुता रखें जो आपकी ग्रोथ से असहज हैं। करुणा रखें, समझ रखें—लेकिन अपनी दिशा न बदलें। हर व्यक्ति अपनी गति से बढ़ता है। आपका काम है आगे बढ़ना, किसी को पीछे छोड़ना नहीं। लेकिन रुक जाना भी समाधान नहीं है।


जब आपकी ग्रोथ दूसरों को असहज करे, तो उसे अपने विरुद्ध न लें। यह इस बात का संकेत है कि आप सही दिशा में बढ़ रहे हैं। हर बदलाव प्रतिरोध लाता है, हर रोशनी छाया बनाती है।


खुद को छोटा मत कीजिए ताकि कोई बड़ा महसूस करे।
खुद को रोशन कीजिए ताकि कोई अपना रास्ता ढूँढ सके।
आपकी तरक्की आपकी जिम्मेदारी है, और उसे जीने का आपको पूरा अधिकार है।

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Rajeev Verma

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