क्यों 70–80% मेहमान
आपकी शादी से नहीं रखते कोई खास ध्यान?
डेटा बोले, इंटरनेट रोए,
पर सच सुनकर दूल्हा-दुल्हन भी थोड़े घबराए।
“फॉर्मैलिटी विज़िट” का ये हाल है,
तीन मिनट से कम का सवाल है।
आओ, नमस्ते, “Congrats” बोलो,
एक सेल्फ़ी खींचो… और चुपचाप डोलो।
WeddingWire भी बोले साफ़-साफ़,
दूल्हा-दुल्हन से मिलना बस रस्म-ओ-रिवाज़।
खाने की है असली कहानी,
71% आए बस थाली की मेहमाननवाज़ी।
WedMeGood ने खोला राज़,
रिश्ते कम, पनीर ज़्यादा खास।
और मज़े की बात सुनो भाई,
सबसे ज़्यादा शिकायत भी—
“खाना ठीक नहीं भाई!”
फैशन शो का मंच सजा है,
शादी नहीं, ramp walk चला है।
60% बोले—“आज तो चमकना है,”
India Today ने सर्वे में पकड़ा है।
दुल्हन पीछे, कैमरा आगे,
मेहमान बोले—“पहले मेरी प्रोफ़ाइल लगे।”
सामाजिक दबाव की मजबूरी,
55% आए—दिल से नहीं, पूरी मजबूरी।
Times of India ने कहा बेहिचक,
“मैं गया तो वो भी आएगा, यही है ट्रक।”
ये मोहब्बत नहीं, लेन-देन है,
शादी नहीं, RSVP का खेल है।
इमोशनल कनेक्शन ? अरे छोड़िए,
करीबी हटाइए, बाकी क्या जानिए ?
न आपकी कहानी, न आपका सफ़र,
बस फोटो, फूड और सोशल कवर।
दिल से नहीं, फ़िल्टर से प्यार,
इंस्टाग्राम खुश, रिश्ते बीमार।
फिर क्यों करते हैं इतना खर्चा?
बड़ा वेन्यू, बड़ी भीड़, बड़ा पर्चा।
बड़ा तनाव, बड़े बिल,उनके लिए…
जिन्हें फर्क ही नहीं, दिल?
तो सीख यही, शादी को हल्का लो,
कम लोग, ज़्यादा अपनापन रख लो।
जो सच में खुश हों, बस वही बुलाओ,
बाकी 71% को…
Swiggy Zomato बताओ!