राजीव वर्मा
अच्छा हुआ…
कि मेरा अंडरवियर डालर का है,
वरना रुपया होता तो
हर भाषण में गिर जाता !
कुर्ता लंबा, वादे और भी लंबे,
जेबें खाली, पर बयान भारी,
देश की हालत टंगी है खूंटी पर,
और हम टांग रहे हैं जिम्मेदारी।
नेता बोले— “सब ठीक है”,
अख़बार बोले— “थोड़ा रुकिए”,
महँगाई हँसी, बेरोज़गारी ठहाके,
और जनता बोले—
“चलो, सह लीजिए।”
अच्छा हुआ…
कि कमर में अभी भी इलास्टिक है,
वरना नैतिकता की तरह
कपड़े भी जवाब दे जाते।
कभी नोट गिरते हैं,
कभी भरोसा फिसलता है,
हर चुनाव में जनता
फिर से उम्मीद सिलती है।
जो ऊपर है वो टिका हुआ है,
जो नीचे है वही गिरता है,
इसलिए नहीं गिरता सिंहासन,
क्योंकि वहाँ शर्म नहीं रहती है।
अच्छा हुआ…
कि मेरा अंडरवियर डालर का है,
कम से कम व्यंग में तो सही,
मेरा आत्मसम्मान संभला हुआ है।
— R.K. Laxman की परंपरा को नमन