एक छोटे से बिंदु की शक्ति

राजीव वर्मा

“एक छोटा-सा बिंदु एक बड़े वाक्य को रोक सकता है,
लेकिन कुछ और बिंदु निरंतरता दे सकते हैं। अद्भुत, लेकिन सत्य। हर अंत एक नई शुरुआत हो सकता है।”

यह पंक्तियाँ देखने में भाषा और विराम-चिह्नों की बात करती हैं, लेकिन इनके भीतर जीवन का गहरा दर्शन छिपा है।

1. बिंदु: पूर्णता और अंत का प्रतीक

लिखित भाषा में बिंदु किसी विचार की समाप्ति दर्शाता है। वह पाठक को संकेत देता है—अब यह बात पूरी हो चुकी है।
जीवन में भी हम कई घटनाओं को इसी तरह पूर्ण विराम मान लेते हैं:

– किसी रिश्ते का टूट जाना

– नौकरी का छूट जाना

– किसी योजना का असफल हो जाना

– जीवन के किसी अध्याय का बंद हो जाना

हम मन में एक “पूर्ण विराम” लगा देते हैं और मान लेते हैं कि अब आगे कुछ नहीं है। यही कारण है कि अंत हमें भारी, दुखद और भयावह लगते हैं।

पर क्या हर अंत सच में अंतिम होता है?

2. तीन बिंदु (…): निरंतरता का संकेत

अब तीन बिंदुओं पर ध्यान दें। ये वाक्य को खत्म नहीं करते, बल्कि उसे आगे बढ़ाते हैं। वे चुपचाप कहते हैं—अभी कहानी बाकी है।

जीवन में ये तीन बिंदु दर्शाते हैं:

– टूटे दिल के बाद का उपचार

– असफलता के बाद सीख

– नुकसान के बाद विकास

– अशांति के बाद आत्मचिंतन

जब हम तुरंत किसी घटना को “अंत” नहीं मानते, तब जीवन नए रूप में आगे बढ़ता है।

3. हमें अंत से डर क्यों लगता है?

अंत हमारे नियंत्रण को चुनौती देते हैं। हमें निश्चितता पसंद है, और अंत अनिश्चितता लेकर आते हैं। हम सोचते हैं:

– अब आगे क्या होगा?

– इसके बिना मैं कौन हूँ?

– अगर इससे बेहतर कुछ न मिला तो?

लेकिन प्रकृति कभी पूर्ण विराम नहीं लगाती:

– रात सुबह में बदल जाती है

– सर्दी के बाद बसंत आता है

– श्वास छोड़ने के बाद श्वास आती है

– निरंतरता ही अस्तित्व का नियम है।

4. हर अंत के भीतर एक बीज होता है

हर अंत अपने भीतर नई शुरुआत का बीज छिपाए होता है:

– नौकरी छूटना आपको सही राह दिखा सकता है

– असफल रिश्ता आत्म-सम्मान सिखा सकता है

– बंद दरवाज़ा खुले अवसर की ओर ध्यान दिला सकता है

– बिंदु एक वाक्य को समाप्त करता है, लेकिन नए अनुच्छेद की शुरुआत भी करता है।

5. हमारी प्रतिक्रिया ही असली अंतर बनाती है

असली फर्क इस बात से पड़ता है कि हम अंत पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं:

– क्या हम बिंदु पर अटक जाते हैं?

– या धैर्य, विश्वास और प्रयास के बिंदु जोड़ते हैं?

वे “कुछ और बिंदु” हैं:

– स्वीकार

– जागरूकता

– साहस

-समय पर भरोसा

यही निराशा को दिशा में बदलते हैं।

6. अंत: शत्रु नहीं, शिक्षक

जब हम अंत से लड़ना छोड़ देते हैं, तब वे हमारे शिक्षक बन जाते हैं। वे भ्रम, अनावश्यक लगाव और झूठी पहचान को हटा देते हैं। जो बचता है, वह है स्पष्टता।

अक्सर लोग वर्षों बाद कहते हैं:

“जिसे मैंने अपने जीवन का सबसे बुरा अंत समझा था, वही मेरी असली शुरुआत थी।”

7. तीन बिंदुओं में लिखा जीवन

सबसे सुंदर जीवन शायद वही है जो पूर्ण विराम के डर से नहीं, बल्कि तीन बिंदुओं के विश्वास से जिया जाता है।

       पल समाप्त हों — पर आशा नहीं।
       चरण बंद हों — पर विकास नहीं।
       दुख रुका दे — पर परिभाषित न करे।

निष्कर्ष: एक छोटा-सा बिंदु सचमुच बड़े वाक्य को रोक सकता है।
लेकिन समझदारी हमें सिखाती है कि कुछ और बिंदु जोड़ें — ताकि जीवन आगे बढ़ सके।

अंत असफलता नहीं होते।
वे निमंत्रण होते हैं।

हर अंत, यदि गहराई से समझा जाए, जीवन की एक मधुर पुकार है:

“यहाँ थोड़ा ठहरो… कुछ नया शुरू होने वाला है।”

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Rajeev Verma

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