राजीव वर्मा
क्षमा मनुष्य के चरित्र का वह उज्ज्वल पक्ष है, जिसकी चमक सबसे कठिन परिस्थितियों में भी मंद नहीं पड़ती। यह वह शक्ति है जो दिल को हल्का करती है, रिश्तों को गहरा करती है और जीवन को सरल बनाती है। कहा गया है कि “क्षमा उन फूलों के समान है जो कुचले जाने के बाद भी खुशबू देना बंद नहीं करते।” यह वाक्य न केवल गहराई लिए हुए है बल्कि मानव जीवन के सबसे महत्वपूर्ण गुणों में से एक को खूबसूरती से परिभाषित करता है।
फूल जब खिलते हैं तो प्रकृति का श्रृंगार बनते हैं। वे अपनी खुशबू, रूप और कोमलता से संसार को आनंदित करते हैं। लेकिन जब उन्हें कोई रौंद भी दे, तब भी उनमें अपनी महक खो देने का गुण नहीं होता। यही बात मानव जीवन में ‘क्षमा’ पर भी लागू होती है। जब हम किसी के द्वारा आहत होते हैं, बुरा सुनते हैं, अपमान सहते हैं या किसी के द्वारा धोखा खा जाते हैं, तब मनुष्य का स्वभाव अक्सर प्रतिक्रिया करने का होता है। परंतु क्षमा का अर्थ ही है – प्रतिक्रिया से ऊपर उठ जाना, चोट को समझना, परंतु द्वेष को न पनपने देना।
क्षमा भीतर की शक्ति का प्रतीक है। यह कमजोरी नहीं, बल्कि सबसे बड़ी ताकत है। मन में पलने वाला क्रोध, द्वेष या बदला लेने की भावना धीरे-धीरे व्यक्ति को भीतर से खोखला कर देती है। क्रोध जलता है बाहर, लेकिन जलाता भीतर है। वहीं क्षमा जलाती नहीं, बल्कि ठंडक देती है—मानो भीषण गर्मी में चलती ठंडी हवा। यह मन के बोझ को हल्का कर देती है और इंसान को अपने वास्तविक स्वभाव—प्रेम, दया और करुणा—की ओर लौटने में मदद करती है।
जीवन में ऐसे कई प्रसंग आते हैं जब लोग हमारी उम्मीदों पर खरे नहीं उतरते। कभी मित्र धोखा देते हैं, कभी परिवार आहत करता है, कभी कार्यस्थल पर अपमान झेलना पड़ता है। ऐसे समय में क्षमा वही दीपक है जो अंधकार में भी अपनी लौ बनाए रखता है। क्षमा करने वाला व्यक्ति अपने भीतर गहरी परिपक्वता विकसित करता है। उसे समझ आने लगता है कि किसी और की गलती पर अपने जीवन की शांति क्यों कुर्बान की जाए? क्यों अपने ही मन में कड़वाहट का बोझ उठाया जाए?
क्षमा का अर्थ यह नहीं कि भूल जाओ या गलत को सही मान लो। क्षमा का अर्थ यह है कि मन को मुक्त कर लो—उस दर्द, उस व्यक्ति, उस घटना से जो तुम्हारी शांति छीन रही है। जब हम क्षमा करते हैं, तो सबसे पहले हम खुद को मुक्त करते हैं। यह आत्मा की स्वच्छता है, मन की धुलाई है, भावनाओं की निर्मलता है।
मानव संबंधों में क्षमा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। रिश्ते गलतियों के कारण नहीं टूटते, बल्कि क्षमा न कर पाने की वजह से टूटते हैं। कोई भी इंसान पूर्ण नहीं होता, हर कोई गलती करता है। यदि हम हर गलती को दिल पर पत्थर बना लें, तो जीवन बोझिल हो जाएगा। लेकिन क्षमा का एक छोटा सा कदम संबंधों में नई ऊर्जा भर देता है। यह दिलों के बीच दूरी घटाता है, प्रेम को पुनर्जीवित करता है और एक नई शुरुआत का अवसर देता है।
महापुरुषों का जीवन क्षमा की अनेक मिसालें देता है। महात्मा गांधी ने कहा था—“कमज़ोर कभी क्षमा नहीं कर सकता। क्षमा करना ताकतवर का गुण है।” यही वजह है कि क्षमा व्यक्ति को बाहरी नहीं, आंतरिक रूप से महान बनाती है।
अंत में, स्मरण रहे कि क्षमा केवल दूसरों को देने का गुण नहीं—यह स्वयं को देने वाली सबसे सुंदर भेंट है। जिस प्रकार फूल रौंदे जाने पर भी अपनी खुशबू नहीं छोड़ता, उसी प्रकार हमें भी अपने स्वभाव, अपनी अच्छाई और अपनी मानवता को किसी के व्यवहार से बदलने नहीं देना चाहिए। जीवन में शांति वहीं है जहाँ क्षमा है। कड़वाहट, क्रोध और बदले की भावनाएँ जितनी जल्दी छोड़ी जाएँ, जीवन उतना ही सुंदर, मुक्त और सुगंधित बन जाता है।
क्षमा वास्तव में वह महक है, जो मनुष्य को भीतर से दिव्यता से जोड़ती है।