राजीव वर्मा
किसी को ठीक-ठीक पहचानना है तो उसे दूसरों की बुराई करते ध्यान से सुनो। मानव स्वभाव बड़ा विचित्र है। हम अक्सर लोगों को उनके कपड़ों, चेहरों, व्यवहार या शब्दों के आधार पर पहचानने की कोशिश करते हैं, लेकिन किसी व्यक्ति का वास्तविक चरित्र उसकी कही हुई बातों में छिपा होता है—विशेषकर उन बातों में जो वह दूसरों के बारे में कहता है। यदि आप वास्तव में किसी के व्यक्तित्व की गहराई जानना चाहते हैं, तो उसकी कही हुई बुराइयों को ध्यान से सुनिए। क्योंकि दूसरों की बुराई करते समय इंसान अपने बारे में सबसे अधिक सच बोलता है।
दूसरों के गुणों की प्रशंसा करना कठिन नहीं, लेकिन जब कोई व्यक्ति बिना वजह दूसरों की गलतियां गिनाता है, उनकी आलोचना करता है, उनके अभावों पर हंसता है या उन्हें नीचा दिखाने की कोशिश करता है, तो वह अनजाने में अपने मन की कमी, असुरक्षा और ईर्ष्या प्रकट कर रहा होता है। ऐसे लोग अक्सर दूसरों के दोषों में अपना अस्तित्व ढूंढ़ते हैं, क्योंकि वे अंदर से हीन भावना और आत्मविश्वास की कमी से ग्रसित होते हैं।
जो व्यक्ति हमेशा शिकायत करता है, आलोचना करता है और दूसरे की सफलता में कमी ढूंढ़ता है, वह स्वयं अपने जीवन से असंतुष्ट होता है। उसकी बातें दूसरों के बारे में कम, और उसकी मानसिकता के बारे में ज्यादा बताती हैं। वह व्यक्ति जिसके भीतर प्रेम, आत्मविश्वास और शांति हो, वह दूसरों की बुराई नहीं करता; वह हर परिस्थिति में अच्छाई ढूंढ़ता है।
दूसरों की बुराई करना एक तरह का मानसिक उत्थान लग सकता है, लेकिन वास्तव में यह नकारात्मकता का जहर है जो धीरे-धीरे व्यक्ति के विचारों और व्यवहार में फैलता है। जो लोग लगातार यह करते हैं, वे अपने जीवन में खुश नहीं रह पाते, क्योंकि उनका ध्यान हमेशा दूसरों की कमजोरियों पर रहता है, अपनी क्षमताओं पर नहीं।
कई बार व्यक्ति दूसरों की बुराई करके खुद को श्रेष्ठ दिखाने की कोशिश करता है, लेकिन सच यह है कि दूसरों को नीचे गिराकर कोई भी खुद ऊँचा नहीं उठ सकता। दुनिया में सच्ची पहचान वही है जो अपने गुणों से चमके, ना कि दूसरों की कमी से।
वहीं दूसरी ओर, जो व्यक्ति दूसरों को समझता है, सम्मान देता है और उनकी अच्छाइयों की बात करता है, वह हमेशा संतुलित और सकारात्मक स्वभाव का होता है। ऐसे लोग जीवन में अधिक सफल और सम्मानित होते हैं, क्योंकि वे लोगों को जोड़ते हैं, तोड़ते नहीं।
किसी के चरित्र को जानने का सबसे आसान तरीका उसकी बातों का विषय जानना है—
* यदि वह दूसरों के बारे में बुरा सोचता या कहता है, तो उसके भीतर नकारात्मकता है।
* यदि वह दूसरों की प्रगति देख खुश होता है, तो उसके भीतर उदारता है।
* यदि वह दूसरों की गलतियों को समझकर भी चुप रहता है, तो उसमें परिपक्वता और धैर्य है।
और
* यदि वह दूसरों की प्रशंसा करता है, तो उसमें प्रेम और विनम्रता है।
अंत में, हमें याद रखना चाहिए कि किसी की कमियां गिनाने से हम बड़े नहीं हो जाते। चरित्र की सच्ची महानता तब होती है जब हम दूसरों की बुराई सुनकर भी अपने शब्दों से सम्मान और संयम बनाए रखें।
इसलिए अगली बार जब कोई व्यक्ति आपके सामने किसी की निंदा करे, तो उसे भी सुने—पर न उस व्यक्ति को पहचानने के लिए जिसकी वह बुराई कर रहा है, बल्कि उसी व्यक्ति को पहचानने के लिए जो निंदा कर रहा है। क्योंकि जो व्यक्ति दूसरों के बारे में बोलता है—उसी से उसके अंदर का असली चेहरा सामने आता है।