राजीव वर्मा
कुछ भी स्थाई नहीं है, अपने आपको बहुत अधिक तनाव न दें, क्योंकि स्थिति चाहे कितनी भी खराब हो, यह बदल जाएगी।
जीवन निरंतर बदलते समय और परिस्थितियों का एक सुंदर प्रवाह है। आज जो हैं, कल वे नहीं रहेंगे; आज की खुशी, दुख, संघर्ष, सफलता, असफलता—सब अस्थाई हैं। यही जीवन का गहरा सत्य है कि कुछ भी स्थाई नहीं होता। यह सत्य हमें दो बातें सिखाता है: एक, दुख में धैर्य रखना, और दूसरी, सुख में विनम्र रहना।
जब हम कठिन समय से गुजरते हैं, तो हमें लगता है कि यही हमारी स्थाई वास्तविकता है। मन चिंता, डर और तनाव से भर जाता है। लेकिन यदि हम गहराई से सोचें तो जीवन का हर पल, हर घटना और हर भावना समय के साथ बदलती रहती है। जो दर्द आज असहनीय लगता है, वही कुछ महीनों या वर्षों में हमारी सबसे बड़ी सीख बन जाता है। यही अनुभव हमें मजबूत और बुद्धिमान बनाता है।
तनाव, भय और चिंता तब जन्म लेते हैं जब हम वर्तमान कठिनाइयों को स्थाई मान लेते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि हर परिस्थिति का एक निश्चित समय होता है—ना खुशी हमेशा रहती है, ना दुख। समय सब कुछ बदल देता है, चाहे हम चाहें या नहीं। इसलिए किसी भी समस्या को अपने मन पर इतना भारी मत बनने दीजिए कि वह आपकी शांति, नींद और आत्मविश्वास छीन ले।
जब जीवन हमें चुनौती देता है, तो हमें उससे भागने के बजाय उसे स्वीकार करने की कला सीखनी चाहिए। क्योंकि परिवर्तन जीवन की सबसे स्वाभाविक प्रक्रिया है। पेड़ों पर पत्ते गिरते हैं, ऋतुएँ बदलती हैं, दिन के बाद रात आती है और रात के बाद सुबह। इसी तरह हमारे जीवन की परिस्थितियाँ भी कभी स्थिर नहीं रहतीं।
इस विचार की एक बड़ी सुंदरता यह भी है कि यह हमें आशा देता है। चाहे समय कितना भी कठिन क्यों न हो, वह गुज़र जाएगा। हर तूफ़ान के बाद शांत मौसम आता है, हर अंधकार के बाद प्रकाश। इसलिए संघर्ष के समय खुद को याद दिलाना चाहिए—
“यह भी बीत जाएगा।”
और जब हम सुख और सफलता में हों, तब यह याद रखना चाहिए कि वह भी स्थाई नहीं है। यह सोच हमें अहंकार से बचाती है और विनम्रता सिखाती है। जीवन का संतुलन इसी में है—दुख में टूटना नहीं और सुख में उछलकर उड़ जाना नहीं।
तनाव छोड़कर स्वीकार करना, समझना और धैर्य रखना ही बुद्धिमत्ता है। जो लोग जीवन के अनिश्चित स्वभाव को समझ लेते हैं, वे तनाव