राजीव वर्मा
उदासी के सन्नाटों में दिल सहम-सा जाता है,
हर धड़कन का मतलब जैसे खो-सा जाता है।
जब जीवन की राहों में अंधेरा फैलने लगता है,
तभी मौत का ख्याल अचानक मन पर छा जाता है।
चेहरे पर मुस्कानों की कमी खलने लगती है,
हर खुशी जैसे दूर कहीं चलने लगती है।
तन्हाई जब सर पर चादर बनकर छा जाती है,
उदासी में मौत की याद तुरंत आती है।
कदम रुकते हैं, सांसें थमती हैं,
आँखें भीगी—बातें नम होती हैं।
दिल टूटे पलों की गूंज जब लौटकर आती है,
मन का हौसला जैसे कहीं खो जाता है।
पर हर रात की तरह इस अंधेरे का भी सवेरा है,
हर टूटन में कहीं एक सीख का बसेरा है।
मौत का ख्याल कमजोर पलों में साथ भले निभाता है,
पर जिंदगी का हाथ थामे तो सब बदल जाता है।
उदासी की गहराई भी एक दिन हल्की पड़ जाती है,
टूटी हुई उम्मीद फिर से सांसें भर जाती है।
इसलिए मौत की याद आए तो घबराना मत,
जीवन की रोशनी फिर एक दिन लौटकर आती है।
उदासी में मौत की याद तुरंत आती है ll