राजीव वर्मा
जब तुम बढ़ते हो,
सब खुश नहीं होते।
तुम्हारी उड़ान में
कुछ दिलों को खतरा महसूस होता है।
तुम्हारी सच्चाई
किसी का भ्रम तोड़ती है,
तुम्हारी सीमाएँ
किसी की आदतों से टकराती हैं।
तुम्हारा साहस
उनके छिपे डर को जगाता है,
और तुम्हारी रौशनी
उनकी परछाइयों को सामने ले आती है।
वे तुमसे नहीं लड़ते—
वे अपने ही दर्द से लड़ रहे होते हैं।
तुम बस वह आईना बन जाते हो
जिसमें उन्हें अपना सच दिखाई देता है।
कभी-कभी नफरत
नफरत नहीं होती,
वह अधूरी कहानियों का दर्द होती है,
जो शब्दों में नहीं बोल पाती।
इसलिए जब लोग बदलते हैं,
ठंडे पड़ते हैं, दूर होते हैं—
अपने आप से पूछना बंद करो,
“मैंने क्या किया?”
और धीरे से समझो—
“मैंने क्या दिखा दिया?”