Rajeev Verma
जीवन में सुकून पाना हर इंसान की ख्वाहिश होती है। लेकिन सुकून कोई बाज़ार में मिलने वाली वस्तु नहीं, बल्कि यह एक मानसिक अवस्था है, जिसे हम अपनी सोच, अपने व्यवहार और अपने निर्णयों से बना सकते हैं। आज की तेज़ रफ्तार और प्रतिस्पर्धा भरी ज़िंदगी में अक्सर हम इस भ्रम में जीते हैं कि हमारे आसपास के सभी लोग हमारे अपने हैं। लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। इसीलिए कहा गया है –
“जीवन में सुकून चाहिए तो सबसे पहले इस भ्रम को दूर कीजिए, कि सब अपने हैं।”
यह सच है कि हर मुस्कुराता चेहरा अपना नहीं होता और हर हमदर्दी भरा शब्द दिल से नहीं होता। लोग तब तक साथ रहते हैं जब तक उन्हें आपकी जरूरत होती है। इसलिए अपनेपन की उम्मीद बहुत सोच-समझकर रखनी चाहिए। जितनी ज़्यादा उम्मीदें होंगी, उतना ही ज़्यादा दुख मिलेगा। जितना कम भरोसा होगा, उतना ही मन मजबूत रहेगा।
खुश रहने का सबसे बड़ा मंत्र है—अपने फैसले खुद लेना। संसार की सोच, रिवाज़, ताने, और तुलना कहीं न कहीं इंसान को उसकी असली पहचान से दूर कर देते हैं। इसलिए यदि आप अपनी खुशी, अपने भविष्य, अपनी प्राथमिकताएं और अपने लक्ष्य दूसरों की राय देखकर तय करेंगे, तो आप हमेशा असंतुष्ट और दुखी रहेंगे।
किसी ने सही कहा है—
“दुनिया को देखकर जो फैसले लेते हैं, वो हमेशा दुखी रहते हैं।”
क्योंकि दुनिया को इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि हम कैसे जी रहे हैं, जब तक कि उनसे कोई मतलब न हो। दुनिया आलोचना करना जानती है, समाधान देना नहीं। इसलिए बेहतर यह है कि हम अपनी जिंदगी अपने हालात, अनुभव और जरूरतों को देखकर जियें।
हर व्यक्ति की परिस्थितियां, संघर्ष, सुख-दुख और अवसर अलग-अलग होते हैं। इसलिए तुलना करना या दूसरों की राह देखकर अपनी दिशा बदलना गलत है। जीवन में सही दिशा वही है, जो आपके लिए सही हो—ना कि वह जो दूसरों को अच्छी लगे।
जीवन में सुकून पाने के लिए कुछ बातें बहुत आवश्यक हैं—
1. अपेक्षाएं कम रखें।
2. किसी भी रिश्ते या परिस्थिति को अंतिम ना समझें।
3. जिस चीज़ को आप नियंत्रित नहीं कर सकते, उसे स्वीकार करना सीखें।
4. निर्णय अपने अनुभव पर आधारित लें, दूसरों की अपेक्षाओं पर नहीं।
5. खुद से प्यार करना सीखें, क्योंकि लोग तब तक आपकी कद्र करेंगे जब तक आप खुद अपनी कद्र करते हैं।
अंत में सिर्फ इतना समझ लेना काफी है—
दुनिया बदलती रहती है, लोग बदल जाते हैं, परिस्थितियां बदलती हैं, लेकिन जो व्यक्ति अपने सिद्धांतों और अपने निर्णयों पर दृढ़ रहता है, वही जीवन में सबसे अधिक सुकून प्राप्त करता है।
इसलिए याद रखिए—
सुकून तब मिलता है जब हम खुद को समझते हैं, खुद को स्वीकार करते हैं और अपनी जिंदगी अपने नियमों से जीते हैं।