Rajeev Verma
अक्सर कहा जाता है कि बुढ़ापा पैरों से शुरू होकर ऊपर की ओर बढ़ता है। यह कथन केवल कहावत नहीं, बल्कि विज्ञान भी इस तथ्य की पुष्टि करता है कि जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, सबसे पहले प्रभाव हमारे पैरों की मांसपेशियों, हड्डियों और संतुलन पर दिखाई देता है। यही कारण है कि पैरों को सक्रिय और मजबूत बनाए रखना लंबी उम्र और स्वस्थ जीवन का आधार माना जाता है।
हमारी उम्र चाहे जो भी हो, हमें बालों के सफेद होने या त्वचा पर झुर्रियों से डरने की ज़रूरत नहीं, बल्कि चिंता इस बात की होनी चाहिए कि क्या हमारे पैर हमारी बढ़ती उम्र को संभालने के लिए पर्याप्त रूप से मजबूत हैं। यही कारण है कि अमेरिकी पत्रिका ‘प्रिवेंशन’ ने दीर्घायु के संकेतों में मजबूत पैरों की मांसपेशियों को सबसे ऊपर रखा है।
डेनमार्क के कोपेनहेगन विश्वविद्यालय में किए गए एक रोचक अध्ययन में पाया गया कि यदि कोई व्यक्ति सिर्फ दो सप्ताह तक पैरों को निष्क्रिय रख दे, तो उसकी पैर की मांसपेशियों की शक्ति 10 वर्ष के बराबर कम हो जाती है। यानी मात्र 14 दिनों की निष्क्रियता व्यक्ति को एक दशक बूढ़ा कर सकती है। वृद्ध और युवा दोनों ही आयु वर्ग के लोगों में मांसपेशी शक्ति में एक-तिहाई तक कमी देखी गई, जोकि चौंकाने वाला तथ्य है।
हमारे शरीर का आधा भार, आधी हड्डियाँ, आधी मांसपेशियाँ और लगभग आधी नसें–रक्तवाहिनियाँ पैरों में ही स्थित होती हैं। मानव शरीर के सबसे महत्वपूर्ण जोड़ भी पैरों में होते हैं। दोनों पैर मिलकर हमारे शरीर की लगभग 70% गतिविधि और कैलोरी बर्निंग के लिए जिम्मेदार हैं। यही कारण है कि पैरों को मानव शरीर का आयरन ट्राएंगल कहा जाता है—जहाँ मजबूत हड्डियां, सक्षम मांसपेशियां और लचीले जोड़ मिलकर पूरे शरीर को स्थिर रखते हैं।
युवा अवस्था में हमारी जांघों की मांसपेशियों में इतनी ताकत होती है कि वे लगभग 800 किलो की कार को थोड़ा ऊपर उठाने की क्षमता रखती हैं। पर जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, यही ताकत कम होती जाती है। धीरे-धीरे मस्तिष्क और पैरों के बीच संकेतों के आदान-प्रदान की गति भी कम हो जाती है, जिससे असंतुलन और गिरने का खतरा बढ़ जाता है। यही कारण है कि बुजुर्गों में हड्डी टूटने की घटनाएँ गंभीर जटिलताओं का कारण बन जाती हैं। आंकड़े बताते हैं कि जांघ की हड्डी टूटने वाले लगभग 15% बुजुर्ग एक वर्ष के भीतर मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं।
लेकिन खुशख़बरी यह है कि पैरों को मजबूत बनाना जीवनभर का काम होना चाहिए और इसे किसी भी उम्र में शुरू किया जा सकता है। 60 वर्ष के बाद भी यदि व्यक्ति नियमित रूप से पैरों का व्यायाम करे, विशेषकर पैदल चले, तो परिणाम अद्भुत हो सकते हैं। पैदल चलना सीनियर सिटिज़न्स के लिए सबसे सुरक्षित, सरल और प्रभावी व्यायाम माना जाता है। नियमित रूप से 30–40 मिनट की तेज़ चाल से पैदल चलना न केवल पैरों को मजबूत करता है बल्कि हृदय, फेफड़ों, रक्त परिसंचरण और शुगर कंट्रोल के लिए भी अत्यंत लाभकारी है।
आजकल कई लोग—जैसे कि आप स्वयं—रोज 80–90 मिनट पैदल चलकर अपना ब्लड शुगर नियंत्रित रखते हैं। यह न सिर्फ स्वस्थ जीवनशैली का उदाहरण है, बल्कि बढ़ती उम्र को मात देने का भी श्रेष्ठ तरीका है।
इसलिए रोज़ाना कम से कम 10 किमी पैदल अवश्य चलें।
अपने पैरों को सक्रिय रखें, मजबूत रखें—क्योंकि स्वस्थ पैर ही लंबी और खुशहाल उम्र का आधार हैं।
मस्त रहें, स्वस्थ रहें, प्रसन्न रहें।