Rajeev Verma
चाहने वालों में होड़ मची है,
हर कोई दिल में जगह बनाने चला है…
किसे समझें अपना, किसे दें हम सुकून,
हर चेहरा आजकल कुछ ज़्यादा ही मुस्कुराने चला है।
अब हम, किसे चाहें !!
ये सवाल दिल को हर रोज़ सताने लगा है…
कौन सच्चा है, कौन बस दिखावे की महफ़िल में,
इसे समझने में ही तो ज़माना गुजर जाने लगा है।
कभी कोई बातों से दिल चुरा ले जाता है,
कभी कोई चुप रहकर भी पास आ जाता है…
कभी कोई अपनी नज़रों से मोह लेता है,
कभी कोई खामोशी में भी एहसास जगा जाता है।
चाहने वालों की भीड़ में खो न जाएँ हम,
दिल की धड़कन भी अब समझदार बनानी है…
प्यार किसी से भी हो सकता है, यह सच है,
पर दिल—
दिल तो वहीं झुकता है,
जहाँ सच्चाई हो,
जहाँ रिश्तों में गर्माहट हो,
जहाँ नियत साफ़ हो,
और जहाँ चाहत बिना शोर के निभानी हो।
इसलिए…
चाहने वालों में होड़ मची है,
पर हमारा दिल जानता है—
अब हम, किसे चाहें !!