नेकी कर, दरिया में डाल

राजीव वर्मा

नफरत का सबसे ज्यादा सामना सच बोलने वालों और भलाई करने वालों को ही करना पड़ता है – यह एक गहरा और कटु सत्य है कि दुनिया में सबसे अधिक विरोध, तिरस्कार और नफरत उन्हीं लोगों को झेलनी पड़ती है जो सच बोलने का साहस रखते हैं और दूसरों की भलाई के लिए कार्य करते हैं। यह विडंबना है कि जिनका उद्देश्य समाज को सुधारना, जागरूक बनाना या किसी के जीवन में प्रकाश लाना होता है, उन्हें ही अंधेरे में धकेल दिया जाता है।

सच बोलना हमेशा आसान नहीं होता। जब कोई व्यक्ति सच्चाई के रास्ते पर चलता है, तो वह झूठ, स्वार्थ और दिखावे के उस संसार से टकराता है जो लोगों ने अपने हितों के लिए रचा होता है। सच कड़वा होता है, और कड़वी चीज़ें बहुतों को पसंद नहीं आतीं। इसलिए जो व्यक्ति सच्चाई को उजागर करता है, वह अक्सर समाज की आलोचना, तानों और विरोध का शिकार बनता है। इतिहास इस बात का गवाह है कि जिन्होंने सच्चाई के लिए आवाज़ उठाई — चाहे वह महात्मा गांधी हों, सुभाष चंद्र बोस हों या भगवान बुद्ध — उन्हें शुरू में लोगों ने विरोध और नफरत से ही नवाज़ा। लेकिन अंततः वही लोग समाज के मार्गदर्शक बने।

भलाई करने वाले भी इस संघर्ष से अछूते नहीं हैं। जो व्यक्ति बिना स्वार्थ के दूसरों की मदद करता है, उसे अकसर लोग शक की नज़र से देखते हैं। आज के समय में जहां अधिकांश लोग अपने फायदे के लिए ही काम करते हैं, वहां किसी का निस्वार्थ भाव से कुछ करना बहुतों को असहज कर देता है। कई बार भलाई करने वाला व्यक्ति दूसरों की ईर्ष्या, आलोचना या अपमान का पात्र बन जाता है। जैसे कहा गया है — “नेकी कर दरिया में डाल”, क्योंकि दुनिया में नेकी का भी मज़ाक उड़ाया जाता है।

सच बोलने और भलाई करने वाले लोगों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि वे दूसरों की नफरत के बावजूद अपने मार्ग से डिगे नहीं। सच्चाई और भलाई दोनों ऐसे दीपक हैं जो अंधकार में भी जलते रहते हैं, चाहे हवा कितनी भी तेज़ क्यों न हो। जो लोग इन सिद्धांतों पर चलते हैं, वे जानते हैं कि लोगों की अस्थायी नफरत से कहीं अधिक मूल्यवान उनका आत्म-संतोष और नैतिक बल है।

समाज को सुधारने वाले, सच कहने वाले और दूसरों की मदद करने वाले लोग भले ही नफरत का सामना करें, लेकिन वही असल में समाज की रीढ़ होते हैं। वे लोगों के विचार बदलते हैं, गलत परंपराओं को चुनौती देते हैं और इंसानियत को जीवित रखते हैं।

इसलिए अगर आप सच बोलते हैं या भलाई करते हैं और लोग आपको पसंद नहीं करते, तो समझिए कि आप सही रास्ते पर हैं। क्योंकि नफरत का सामना वही करता है जो झूठ और बुराई की दीवारों को हिलाने की ताकत रखता है। समय के साथ यही नफरत सम्मान में बदल जाती है, और दुनिया उन्हीं लोगों को याद रखती है जो कठिनाइयों के बावजूद सच्चाई और अच्छाई का झंडा ऊंचा रखते हैं।

निष्कर्ष:
नफरत का सामना सच बोलने वालों और भलाई करने वालों को भले ही आज झेलना पड़े, लेकिन कल वही लोग समाज की प्रेरणा बनते हैं। क्योंकि सच्चाई और नेकी की राह कठिन जरूर है, पर यही वह राह है जो इंसान को अमर बना देती है।

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Rajeev Verma

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