आगे देखें, पीछे देखें, आसपास देखें, भीतर देखें : आत्म-जागृति

राजीव वर्मा

आगे देखें, पीछे देखें, आसपास देखें, भीतर देखें: आत्म-जागृति की संपूर्ण यात्राजीवन सीखने, बदलने और स्वयं को समझने की एक निरंतर यात्रा है। पीछे, आगे, आसपास और भीतर — ये चार सरल दिशाएँ हमें इस सुंदर सफर में मार्ग दिखाती हैं।

हर दिशा हमें एक महत्वपूर्ण सीख देती है, जो हमारे जीने और सोचने के तरीके को बदल सकती है।

“आगे देखें और आशा देखें”

आशा हमारी यात्रा का ईंधन है। जब हम आगे देखते हैं, तो नए अवसरों, नई उपलब्धियों और अनजानी संभावनाओं की कल्पना करते हैं। भविष्य भले ही अनिश्चित हो, लेकिन वह अनगिनत संभावनाओं से भरा होता है। आगे देखने से सकारात्मक विचार पैदा होते हैं, जो हमारे जीवन में प्रगति को आकर्षित करते हैं। यह हमें कठिन समय में धैर्य और बदलाव के समय उत्साह देता है। आशा हमें बताती है कि हर अंधेरी रात के बाद उजाला जरूर आता है।

“पीछे देखें और अनुभव प्राप्त करें”

हमारा अतीत सीखों का खज़ाना है। जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं, तो सफलता और असफलता, खुशी और दुख, साहस और डर — हर पल हमें दिखाई देता है। यही अनुभव हमें आज का इंसान बनाते हैं। वे हमें बताते हैं कि क्या दोहराना है और किन गलतियों से बचना है। पीछे देखने का मतलब पछतावा करना नहीं है — बल्कि सीख लेना और अपनी प्रगति का सम्मान करना है। हर संघर्ष हमें मजबूत बनाता है। इसलिए अतीत को ज्ञान की पाठशाला की तरह देखिए — जो हमारे भविष्य की नींव को मजबूत बनाती है।

“आसपास देखें और वास्तविकता सीखें”

जीवन केवल सपनों और यादों में नहीं रहता, बल्कि इस वर्तमान क्षण में भी होता है। जब हम अपने आसपास की स्थिति को देखते हैं, तो हमें जीवन की सच्चाई पता चलती है। आसपास देखने से हमें उन लोगों का एहसास होता है, जो हमारे साथ हैं, वे अवसर दिखते हैं जो हमारे पास पहले से मौजूद हैं, और वे कदम समझ आते हैं जो हमें अभी उठाने हैं। वास्तविकता कभी-कभी भ्रम तोड़ती है, पर हमें जिम्मेदार बनाती है। यह हमें वर्तमान की कद्र करना और सही दिशा में कार्य करना सिखाती है।

“भीतर देखें और आत्मविश्वास पाएँ”

सबसे बड़ी शक्ति हमारे भीतर होती है। जब हम स्वयं के भीतर झाँकते हैं, तो हमें अपनी वास्तविक आवाज़ सुनाई देती है — जो कहती है कि हम सक्षम हैं, मजबूत हैं और योग्य हैं। आत्म-चिंतन हमें हमारी खूबियों, मूल्यों और उद्देश्य से परिचित कराता है। आत्मविश्वास दूसरों की स्वीकृति से नहीं, बल्कि स्वयं को पहचानने से पैदा होता है। जब हम खुद पर भरोसा करते हैं, तो हर चुनौती का सामना साहस से कर सकते हैं। भीतर झाँकने से हमें अपनी पहचान मिलती है — और यही पहचान हमें शक्ति और शांति देती है।

निष्कर्ष

जीवन तभी सार्थक बनता है जब हम इन चारों दिशाओं में देखना सीख जाते हैं। अतीत हमें अनुभव देता है। भविष्य हमें आशा देता है। वर्तमान हमें वास्तविकता दिखाता है। और भीतर की आवाज़ हमें आत्मविश्वास देती है। जब हम इन सभी सीखों को अपनाते हैं, तो हम सिर्फ सफल नहीं बनते, बल्कि समझदार भी बनते हैं। इसलिए जीवन के हर चरण में — पीछे, आगे, आसपास और भीतर — देखना न भूलें, क्योंकि हर दिशा में एक अनमोल सीख छिपी है।

Published by

Unknown's avatar

Rajeev Verma

Thanks For watching. Note:- ALL THE IMAGES/PICTURES SHOWN IN THE VIDEO BELONGS TO ME. I AM THE OWNER OF ANY PICTURES SHOWED IN THE VIDEO ! DISCLAIMER: This Channel DOES NOT Promote or encourage Any illegal activities , neither any services of any child is taken in this video making, all contents provided by this Channel is meant for Sharing Knowledge and awareness for health only . Rajeev Verma #HealthyFeasting. I Loves to post videos on Preventive Health Maintenance Food Recipes. Subscribe my YouTube Channel NOW. http://www.youtube.com/c/HealthyFeasting

Leave a comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.