प्रेम की शर्त

राजीव वर्मा

अगर घर में विवाद हो, पत्नी जीत जाती है – चाहे गलत हो, चाहे सही हो – क्योंकि पति उस पर निर्भर है कामवासना के लिए । वह डरता है, व्यर्थ का विवाद खड़ा करो, वह कामवासना से इंकार कर देगी । झंझट करो, तो प्रेम मिलना मुश्किल हो जाएगा । और प्रेम चाहिए तो इतना सौदा करना पड़ता है । इसलिए अक्सर पति हार जाता है । और पत्नी जानती है । इसलिए दो ही मौके पर पत्नियां उपद्रव खड़ा करती है – या तो पति भोजन कर रहा हो, या प्रेम करने की तैयारी कर रहा हो । क्योंकि वही दो बातो पर वह निर्भर है । उन्ही दो बातों पर वह गुलाम है । इसलिए पति भोजन की थाली पर बैठा कि पत्नी की शिकायतें शुरू हो जाती है । उपद्रव शुरू हुआ । और पति डरता है कि किसी तरह भोजन… तो हां-हूं भरता है।और ध्यान रहे, भोजन और कामवासना दोनों जुड़े हैं ।

भोजन तुम्हारे अस्तित्व के लिए जरुरी है, व्यक्ति के; और कामवासना समाज के अस्तित्व के लिए जरुरी है । कामवासना एक तरह का भोजन है, समाज का भोजन । और वह व्यक्ति का भोजन है । दोनों बातों पर पति निर्भर है । इसलिए बड़े से बड़ा पति, चाहे वह नेपोलियन क्यों न हो, घर लौटकर दब्बू हो जाता है । नेपोलियन भी जोसोफिन से ऐसा डरता है जैसे कोई भी पति अपनी पत्नी से डरता है । वह सब बहादुरी, युद्ध का मैदान, वह सब खो जाता है । क्योंकि यहां किसी पर निर्भर है । कुछ जोसोफिन से चाहिए, जो कि वह इंकार कर सकती है ।

वेश्याएं ही अपने शरीर का सौदा करती है, ऐसा आप मत सोचना; पत्नियां भी करती है । क्योंकि यह सौदा हुआ कि इतनी बातों के लिए राजी हो जाओ, तो शरीर मिल सकता है; नहीं तो नहीं मिल सकता । शरीर चाहिए, तो इतनी बातों के लिए राजी हो जाओ । इसलिए क्रोध पति का पत्नी पर बना रहता है । पत्नी का क्रोध पति पर बना रहता है । क्योंकि वह भी निर्भर है इस पर ।

जहां भी निर्भरता है, वहां क्रोध होगा, वहां प्रेम नहीं हो सकता।प्रेम तुम उसी दिन कर पाओंगे, जिस दिन तुम निर्भर नहीं हो । जिस दिन तुम स्वावलंबी हुए, प्रेम की दिशा में स्वावलंबी हुए । तुम अकेले भी हो सकते हो, और तुम्हारे आनंद में रत्तीभर फर्क नहीं पड़ेगा । बस, उस दिन तुम प्रेम कर सकोगे और उसी दिन पत्नी तुम्हारी तुम्हें सताना बंद करेगी । क्योंकि अब वह जानती है कि अब सताने का कोई अर्थ नहीं रहा, अब झुकाने का कोई उपाय नहीं रहा, निर्भरता समाप्त हो गई है ।

🔹 1. पति-पत्नी के विवाद का मूल कारण — निर्भरता

घर में जब विवाद होता है, तो अक्सर पत्नी जीत जाती है, चाहे वह सही हो या गलत।क्यों? क्योंकि पति पत्नी पर निर्भर है, विशेषकर कामवासना (sexual needs) के लिए। पति के मन में यह डर बैठा होता है — “अगर मैंने विरोध किया या झगड़ा बढ़ाया, तो वह मुझसे दूरी बना लेगी। प्रेम, स्नेह, या शारीरिक संबंध बंद कर देगी।” इस डर के कारण पति समझौता कर लेता है, हार मान लेता है। और पत्नी यह जानती है कि पति को कैसे “कंट्रोल” करना है — उसकी जरूरतों के ज़रिए।

🔹 2. पत्नी विवाद कब करती है

पत्नी दो ही समय अधिकतर विवाद खड़ा करती है —

1. जब पति भोजन करने बैठता है, या

2. जब पति प्रेम करने की तैयारी में होता है।

क्योंकि ये दोनों क्षण ऐसे हैं, जब पति सबसे अधिक निर्भर होता है। भोजन शरीर की ज़रूरत है, और प्रेम या कामवासना भावनात्मक और सामाजिक ज़रूरत है। इसलिए, वह जानती है कि इन क्षणों में यदि विरोध या शिकायत करेगी, तो पति झगड़े से बचने के लिए “हां-हूं” कर देगा, और उसकी बात मान लेगा।

🔹 3. भोजन और कामवासना का गहरा संबंध

“भोजन व्यक्ति के अस्तित्व के लिए ज़रूरी है, और कामवासना समाज के अस्तित्व के लिए।” इसका अर्थ यह है कि भोजन से व्यक्ति जीवित रहता है, और कामवासना से समाज की निरंतरता बनी रहती है (संतान उत्पत्ति के माध्यम से)।इस प्रकार दोनों ही मूलभूत ज़रूरतें हैं — और पति इन्हीं दो बातों में सबसे अधिक निर्भर होता है।

🔹 4. निर्भरता से प्रेम नहीं, क्रोध पैदा होता है

जब कोई व्यक्ति किसी पर निर्भर होता है, तो उसके भीतर भीतरी क्रोध (inner anger) उत्पन्न होता है — क्योंकि निर्भरता हमेशा बंधन का अहसास कराती है। पति को लगता है — “मैं उसकी इच्छा के बिना कुछ नहीं कर सकता।” पत्नी को भी लगता है — “मुझे भी उसकी जरूरत है।” इससे दोनों में तनाव बना रहता है। बाहर से प्रेम दिखता है, पर भीतर छिपा हुआ आक्रोश रहता है।

🔹 5. असली प्रेम कब संभव है?

“जहां निर्भरता है, वहां प्रेम नहीं हो सकता।” जब तक तुम किसी पर अपनी खुशी, सुरक्षा, या आनंद के लिए निर्भर हो, तब तक तुम स्वतंत्र नहीं हो और प्रेम केवल स्वतंत्र व्यक्ति ही कर सकता है।जिस दिन व्यक्ति अपने भीतर इतना मजबूत हो जाता है कि उसे किसी से कुछ पाने की इच्छा नहीं रहती — न प्रेम पाने की, न ध्यान पाने की, न शरीर पाने की — उसी दिन वह सच्चा प्रेम करने में सक्षम होता है।

🔹 6. जब निर्भरता समाप्त होती है

जब पति या पत्नी में से कोई एक आत्मनिर्भर (emotionally independent) हो जाता है —तब दूसरा व्यक्ति उसे नियंत्रित नहीं कर सकता। फिर न झगड़े रह जाते हैं, न डर क्योंकि तब प्रेम “सौदे” पर आधारित नहीं होता, बल्कि आनंद और सम्मान पर आधारित होता है।

जिस दिन निर्भरता समाप्त हो जाएगी, उसी दिन पत्नी तुम्हें सताना बंद कर देगी क्योंकि तब उसे समझ आ जाएगा कि अब तुम्हें झुकाना या डराना व्यर्थ है — तुम अपने भीतर पूर्ण हो चुके हो।

सारांश

विषय अर्थविवाद का कारण कामवासना और भावनात्मक निर्भरता

पत्नी का समय चुनना जब पति सबसे निर्भर होता है। भोजन और कामवासना व्यक्ति और समाज की मूल ज़रूरतेंनिर्भरता का परिणाम क्रोध और तनाव। असली प्रेम की शर्त आत्मनिर्भरता और स्वावलंबनजब निर्भरता खत्म होती है तब प्रेम स्वतंत्र और सच्चा होता है

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Rajeev Verma

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