✨ कविता ✨ मर्द को फ्री में प्यार नहीं मिलता

राजीव वर्मा

मंदिर की घंटी सी खनकती आवाज़,

पर दिल की तन्हाई में नहीं कोई राज़।

बीवी का हँसता चेहरा, बच्चों की चंचल बात,

फिर भी कुछ अधूरा सा हर कदम की सौगात।

माँ की ममता, बाप की थकान भरी छाया,

बहन भाई का साथ, हर दर्द को सहलाया।

पर सवाल ये उठता हर रोज़ तन्हाई में,

क्या मर्द को भी मिलता है बिना मेहनत की सुकून की परछाई में ?

प्यार की डगर में नहीं चलता कोई फ्री पास,

हर मुस्कान की कीमत होती है गहरी आस।

किसी ने नहीं थमाया तोहफा बे-मूल्य यहाँ,

हर प्यार के पीछे छुपा है संघर्ष का यहाँ।

बीवी की नाराजगी, बच्चों की चुप्पी,

बहन भाई की उलझन, माँ-बाप की खामोशी भी।

मर्द की दुनिया भी है जद्दोजहद की बात,

जहाँ बिना तहे दिल के नहीं मिलता कोई साथ।

तो समझो ये सच्चाई बिना किसी बहाने के,

प्यार के हर रिश्ते में छुपा होता है त्याग के गीत।

मर्द को भी चाहिये सम्मान और अपनापन,

कोई फ्री का प्यार नहीं, बस ईमानदारी का अपनापन।

💔 मर्द को फ्री में प्यार नहीं मिलता 💔

बीवी बोले – “प्यार है तो दिखाओ !

“बच्चे पूछें – “पैसा लाओ!”

बहन कहे – “थोड़ा साथ दो!”

बाप बोले – “तू मेहनत कर, बेटा!”

माँ की ममता भी बिकाऊ हो चली,

हर मुस्कान के पीछे छुपी एक डील।

कहते थे जो पहले – “बिना शर्त प्यार होगा,”

अब वही प्यार भी लगता है बस कारोबार होगा।

दोस्तों की बातें भी अब फीकी-सी लगी,

हर मिलने की कीमत, हर बात की डिग्री।

सिर पर सरस्वती, हाथ में अकाउंट बही,

भावनाओं की जगह अब नंबर की रेखा यही।

कभी सोचता था मर्द भी प्यार में अमीर,

अब समझता है, वह भी बस संघर्ष का अधीर।

फ्री में नहीं मिलता यहाँ कुछ भी आसान,

चाहे हो बीवी, बच्चे, बहन, भाई या माता-पिता का जहान।

हर रिश्ता बना एक लेन-देन की बात,

जहाँ भावनाएँ बिकती हैं नीलाम रात।

तो चलो स्वीकार करें ये कठोर सच्चाई,

मर्द को भी चाहिए प्यार, मेहनत की छाँव तले पाई।

💔 मर्द को फ्री में प्यार नहीं मिलता 💔

पहले कहते थे –”प्यार तो है निशुल्क, बिना शर्त, बिना हिसाब।”

पर ये दुनिया बदल गई,

अब हर रिश्ता बन गया व्यापार का हिसाब।

बीवी कहती है –”अगर पैसा नहीं लाओगे, तो मोहब्बत नहीं पाओगे।”

बच्चे पूछते हैं –”पापा, हमें खेल-खिलौने चाहिए, मोहब्बत तो खाना नहीं खिलाती!”

बहन भाई के बीच भी नहीं बची कोई मासूमीयत,

हर एहसान का रसीद माँगते हैं अब सब लोग।

माँ-बाप की ममता भी हो चली कमोडिटी,

जहाँ संवेदना बिकती है नोटों की भरमार में।

मर्द के दिल की पीड़ा अब गहराई में दब गई,

जहाँ चाहत भी लगती है किसी करार की पन्नी।

कभी जो था ताजगी का फूल –अब बन गया है जिम्मेदारी का बोझ।

कितनी बार चुपके से आँसू पोछे,

कितनी बार खुद को समझाया –”ये भी एक हिस्सा है जिंदगी का खेल।”

पर दिल कहता है –”क्यों हर रिश्ते की कीमत तोड़ी जाती है?”

प्यार चाहिए तो देना पड़ेगा पसीना,

समझाना पड़ेगा अपने दर्द को मुस्कान में।

यहाँ फ्री में नहीं मिलता कोई एहसास,

हर संबंध के पीछे छुपा होता है संघर्ष का विश्वास।

तो आइए, स्वीकार करें ये बेरहम सच,

जहाँ मर्द भी चाहता है सच्चा प्यार,

मगर उसे भी बनना पड़ता है इस दुनिया की तरह व्यापार।

💔 मर्द को फ्री में प्यार नहीं मिलता 💔

सुना था पहले –”प्यार बेमोल होता है, बिना कोई लेन-देन।”

पर आज हर घर, हर रिश्ते की दीवार बनी है—

पैसे की दरार, दिखावे की बेड़ियाँ।

बीवी की नज़रें पूछती हैं हर महीने की उधारी,

बच्चों की मुस्कान भी बन गई है टॉफ़ी की खरीदी।

बहन भाई की बातें नहीं भाव की मिठास,

बल्कि फॉर्म भरने की औपचारिकता, हाँ, यही तो बात खास।

माँ-बाप की ममता भी अब सिमट गई है,

“तेरे भले के लिए जीता हूँ, पर बील भरवाओ।”

कभी जो दिया करते थे बिना सोचे, समझे,

अब जवाब मांगते हैं, हर पल, हर शब्द पर।

मर्द की पीड़ा को कौन समझे ?

हर दिन एक नए सवाल की गोलियों से भरा।

“क्यों नहीं बनाता बड़ा घर?”

“क्यों नहीं लाता बड़ी गाड़ी?”

“क्यों नहीं बना दिया सबकुछ पूरी तरह से व्यवस्थित?”

प्यार नहीं बिकता फ्री में इस बाजार में,

यहाँ तो मिलता है हर भावना का रेट कार्ड।

इज्जत, अपनापन, सहारा –सब कुछ बना दिया गया है कागज की टुकड़ों में।

मर्द भी चाहता है स्नेह का स्पर्श,

कोई बिना कारण मुस्कुराए, बिना हिसाब अपनाए।

पर यहाँ चलती है केवल लेन-देन की बातें,

जहाँ हर एहसास को तोला जाता है वजन और कीमत में।

इस बेरहम दुनिया में बस एक सच बचा है

“प्यार भी बिकता है,अगर तुमने उसका मूल्य चुकाया हो।”

🌿 मर्द को फ्री में प्यार नहीं मिलता 🌿

माना कि दुनिया बदल गई है,

रिश्ते अब बनते हैं लेन-देन की कड़ी।

पर फिर भी कहीं गहराई में छुपा है,

एक अनमोल सच, एक पुरानी उम्मीद की बड़ी।

बीवी की खामोशी में छुपा है सवाल,

बच्चों की मासूमियत में भी अब है एक हाल।

बहन भाई के रिश्ते भी बने हैं अनुबंध,

माँ-बाप की ममता भी मांगती हैं साथ।

मर्द का दिल भी धड़कता है प्यार के लिए,

ना कोई रसीद, ना कोई शर्त की ज़रूरत।

बस एक सरल एहसास, एक निःस्वार्थ स्पर्श,

जो बने रिश्तों का असली आधार, सरल और सच्चा।

हर रोज़ की जद्दोजहद में छुपा संघर्ष,

मर्द भी चाहता है अपनापन का आराम।

वो भी चाहता है बिना हिसाब के मोहब्बत,

जिसमें ना हो कोई बाजार का तामझाम।

पर ये सच है –कोई भी सच्चा प्यार मुफ्त नहीं मिलता।

यह चाहिए मेहनत से अर्जित करना,

सहनशीलता से पालना, विश्वास से निभाना।

तो चलो फिर, बनाएं इस दुनिया को बेहतर,

जहाँ हर मर्द को मिले स्नेह का वरदान।

ना हो लेन-देन का खेल, ना बने रिश्तों की कीमत,

बस हो प्रेम, अपनापन, और सच्चाई की प्रीत।

🌱 क्योंकि मर्द को भी चाहिए वही प्यार,

जो दिल से दिया जाए, बिना किसी हिसाब- किताब के। 🌱

राजीव वर्मा

Published by

Unknown's avatar

Rajeev Verma

Thanks For watching. Note:- ALL THE IMAGES/PICTURES SHOWN IN THE VIDEO BELONGS TO ME. I AM THE OWNER OF ANY PICTURES SHOWED IN THE VIDEO ! DISCLAIMER: This Channel DOES NOT Promote or encourage Any illegal activities , neither any services of any child is taken in this video making, all contents provided by this Channel is meant for Sharing Knowledge and awareness for health only . Rajeev Verma #HealthyFeasting. I Loves to post videos on Preventive Health Maintenance Food Recipes. Subscribe my YouTube Channel NOW. http://www.youtube.com/c/HealthyFeasting

Leave a comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.