- राजीव वर्मा
रोटी जली,
रसोइए ने कहा – “तवा बदल दो।”
बीवी बोली – “तवा बदल दूँ ?
अरे तवा तो सास की दहेज का है,
इसको बदलना गुनाह है !
“रोटी फिर जली,
रसोइए ने कहा – “आटा बदल दो।”
ससुरजी बोले – “हमारा गेहूँ ऑर्गेनिक है,
पिसवाया था शर्मा चक्की से,
आटे को मत कोसो,
अपने नसीब को कोसो ! “
रोटी फिर जली,
रसोइए ने कहा – “पानी बदल दो।”
बच्चे बोले –
“हम तो मिनरल वाटर पीते हैं,
अगर पानी बदला तो हमें भी पेट दर्द होगा,
क्योंकि हमारा पेट भी VIP है !”
रोटी फिर जली,
रसोइए ने कहा – “चूल्हा बदल दो।”
पड़ोसी दौड़े आए – “अरे भाई, चूल्हा मत बदलो,
गैस कनेक्शन हमारा नाम से है,
पकड़ी जाएगी ब्लैक लिस्टिंग !”
रोटी जलती रही,
काला धुआँ छत तक जाता रहा,
कुत्ता भी सोच में पड़ गया,
“ये रोटी है या कोयला ?”
आख़िर में दादी बोलीं –
“बेटा, एक काम करो,
या तो शादी बदल दो,
या फिर रसोइया बदल दो !”
लेकिन हिम्मत किसी में न हुई,
सबने बहाने ही ढूँढे,
रोटी जलती रही…
और रसोइया हँसता रहा –
“जलने दो, इस घर में सबको
बदला चाहिए, पर बदलाव नहीं !”